जो बीत गया सो बीत गया,
काहे को तूँ उदास भया,
हर बेला नूतन, नया हर पल,
नए क्षितिज होंगे सामने कल,
नया होगा अंबर, नए होंगे तारे,
नए-नए मिलेंगे अवसर सारे,
नए होंगे सोपान, नए आयाम,
बढ़ आगे, तज सब विश्राम,
देख तुझे बुलाते नए गंतव्य,
समझ भाग्य का तूँ मंतव्य,
बढ़ आगे सब पीछे छोड़,
कभी लौटेंगे न बीते मोड़,
तूँ भी वह नहीं जो था तूँ कल,
समझ इसे, तुझे मिलेगा बल,
यह नवीनता देगी तुझे एक नयी दिशा,
नयी अरुणायी है गर्भ में लाती हर निशा,
सतत परिवर्तन ही तो है जीवन का सार,
सम्मुख रख इस सत्य को, न होगी तेरी हार!
अरुण भगत
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