चाय दिवस पर चाय को समर्पित एक कविता

  चाय की भी क्या ग़ज़ब कहानी है  चाय से ही तो रगों में रवानी है !  चाय की है दीवानी सारी दुनिया  बच्चू चाचा हों या फिर हो मुनिया ! चाय है तो हमारी शामें रंगीन हैं  चाय न कोई पूछे तो तौहीन है !  चाय से है यारों की महफ़िल सजती  ख़ुशबू चायContinue reading “चाय दिवस पर चाय को समर्पित एक कविता”

वही कहलाता जीवन योद्धा

मन विकल हो तो उसे ढाँढस बँधाइए  गर्त में निराशा की कभी न जाइए!  पग-पग मुश्किलें रोकेंगी रास्ता  विकराल बाधाओं से पड़ेगा वास्ता,  फ़न फैलाए मिलेंगे विषधारी नाग  चहूँओर होगी झुलसा देने वाली आग,  साहसी  वही धैर्य का जिसके बाँध न टूटे  विषाद-संताप का उसके ज्वालामुखी न फूटे,   उफनती लहरों के बीच जो रहेContinue reading “वही कहलाता जीवन योद्धा”

हम गुज़र जाते हैं

वक्त गुज़र जाता है , इंसान गुज़र जाते हैं  बस हम यूँ ही ठगे-ठगे खड़े रह जाते हैं!  गुज़र जाते हैं दिन, गुज़र जाती हैं रातें  गुज़र जाते हैं वाक़यात, रह जाती हैं बातें !  गुज़र गए पोरस, गुज़र गए सिकंदर  मिट गए जहां से जिन्हें कहते थे धुरंधर !  गुज़र जाती हैं आँधियाँ, गुज़रContinue reading “हम गुज़र जाते हैं”

हमें यह रहस्य कौन समझाये?

ज़िंदगी चला-चली का मेला  देखो आने-जाने वालों का रेला !  जो है दिखता सब क्षण भंगुर  यूँ बादल की तरह उड़ जाये !  जो पेड़ बना , था कभी वह अंकुर  जीवन की थाह कोई नाप न पाये !  पेड़ जो मरा तो रह जाएगा  अंकुर  फिर बन जाएगा वृक्ष विशालकाय ! पर्दे पर नाचतेContinue reading “हमें यह रहस्य कौन समझाये?”

आज को संवारिये

जीवन नित नया, जो बीत गया  सो बीत गया! बीती बात बिसारिये  आज को  संवारिये,  अतीत की गठरी उतारिये  स्वयं को यूँ  ही न मारिये, आज को जियो होकर मुक्त  यूँ ही न हो जाये वह लुप्त,  आज की संभावनाएं असीमित  न कर ख़ुद को तूँ सीमित, स्वच्छंद भाव से जी हर पल  तभी सुनहराContinue reading “आज को संवारिये”

निश्चय कर आगे बढ़ जा

लाँघ सब सीमाओं को  तूँ हो जा विस्तृत, नहीं बना तूँ पराजय हेतु  न होने को तिरस्कृत!  अपने बंधन खोल कर  तूँ हो जा मुक्त, जान ले, असीम सम्भावनाओं से  सदा से है तूँ युक्त!   विशालता है तेरी पूंजी  अमरत्व तेरा गंतव्य, विचलित न हो इस पथ से यही है तेरा कर्तव्य!  निश्चय करContinue reading “निश्चय कर आगे बढ़ जा”

नये साल की नयी कहानी

भूल-चूक जी  माफ करो  नये साल में मन साफ़ करो  नये साल की नयी कहानी  रगों में हो इक नयी रवानी  नये साल की हों नयी उमंगें  मन में हों पल्लवित नयी तरंगें  नये साल की नयी हो बोली  प्रेम-प्यार की खेलें होली  नये साल की नयी हो बातें   निकले सूरज,छँट जाएँ रातें   नयेContinue reading “नये साल की नयी कहानी”

गावो मंगल, मनाओ हर्ष

नव वर्ष हम सब के लिए और समस्त विश्व के लिए मंगलमय हो।    देखो आया नूतन वर्ष  गावो मंगल, मनाओ हर्ष  विकसित हो एक नई चेतना  मानव समझे मानव की वेदना  हर दिल में  पनपे प्रेम अपार  हो सुंदर जग का स्वप्न साकार  सबल चरित्र हो, इरादे नेक  ह्रदय से हो जायें सब एक Continue reading “गावो मंगल, मनाओ हर्ष”

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