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- हम गुज़र जाते हैंवक्त गुज़र जाता है , इंसान गुज़र जाते हैं बस हम यूँ ही ठगे-ठगे खड़े रह जाते हैं! गुज़र जाते हैं दिन, गुज़र जाती हैं रातें गुज़र जाते हैं वाक़यात, रह जाती हैं बातें ! गुज़र गए पोरस, गुज़र गए सिकंदर मिट गए जहां से जिन्हें कहते थे धुरंधर ! गुज़र जाती हैं आँधियाँ, गुज़रContinue reading “हम गुज़र जाते हैं”
- हमें यह रहस्य कौन समझाये?ज़िंदगी चला-चली का मेला देखो आने-जाने वालों का रेला ! जो है दिखता सब क्षण भंगुर यूँ बादल की तरह उड़ जाये ! जो पेड़ बना , था कभी वह अंकुर जीवन की थाह कोई नाप न पाये ! पेड़ जो मरा तो रह जाएगा अंकुर फिर बन जाएगा वृक्ष विशालकाय ! पर्दे पर नाचतेContinue reading “हमें यह रहस्य कौन समझाये?”
- आज को संवारियेजीवन नित नया, जो बीत गया सो बीत गया! बीती बात बिसारिये आज को संवारिये, अतीत की गठरी उतारिये स्वयं को यूँ ही न मारिये, आज को जियो होकर मुक्त यूँ ही न हो जाये वह लुप्त, आज की संभावनाएं असीमित न कर ख़ुद को तूँ सीमित, स्वच्छंद भाव से जी हर पल तभी सुनहराContinue reading “आज को संवारिये”