Outpourings of my ❤️

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Latest from the Blog

  • बस सब आधा-आधा!
    अधूरी ज़िंदगी भी क्या ज़िंदगी ! अधूरे सपने, अधूरी ख्वाहिशें , अधूरी चाहतें , अधूरे रिश्ते , अधपकी सोच, आधा सा वजूद , दबा सा जोश , ज़रा सा होश , सिमटे सकुचाते से एहसास, पास हो कर भी न हो कोई पास ,  पर कटे असूल, क्या हो उनसे वसूल?  मानो अधर में लटकेContinue reading “बस सब आधा-आधा!”
  • इंतज़ार है—
    इंतज़ार है उस दिलकश सुबह का  जब फरेब के ढेर  से सच निकलेगा  निकलेगा भी और निखरेगा भी  चमकेगा बुलंद सितारा बन कर।  कटहरे में खड़ा हर बे-ईमान होगा  रहनुमाओं का कोई ईमान होगा  ज़ुबान की कोई क़ीमत होगी  धूप सी उजली सीरत होगी।  साफ़गोई की आग दहकेगी  तभी तो ये बगिया महकेगी।  दिल-ओ-दिमाग़ जबContinue reading “इंतज़ार है—”
  • मौन की है अपनी महिमा
      शब्द जाल से बाहर निकल  मौन का तू महत्व समझ, शब्द हमें हैं उलझाते  शब्द हमें हैं भरमाते, शब्द कोलाहल बढ़ाते  शब्द बाण हमें सताते, मौन की है अपनी महिमा  कर संचित उसकी गरिमा,  मौन में है परम शांति  अद्भुत है मौन की कांति, मौन की महिमा अपरंपार  मौन में समाहित पूर्ण विस्तार,  शब्दContinue reading “मौन की है अपनी महिमा”
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