Outpourings of my ❤️

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Latest from the Blog

  • हम गुज़र जाते हैं
    वक्त गुज़र जाता है , इंसान गुज़र जाते हैं  बस हम यूँ ही ठगे-ठगे खड़े रह जाते हैं!  गुज़र जाते हैं दिन, गुज़र जाती हैं रातें  गुज़र जाते हैं वाक़यात, रह जाती हैं बातें !  गुज़र गए पोरस, गुज़र गए सिकंदर  मिट गए जहां से जिन्हें कहते थे धुरंधर !  गुज़र जाती हैं आँधियाँ, गुज़रContinue reading “हम गुज़र जाते हैं”
  • हमें यह रहस्य कौन समझाये?
    ज़िंदगी चला-चली का मेला  देखो आने-जाने वालों का रेला !  जो है दिखता सब क्षण भंगुर  यूँ बादल की तरह उड़ जाये !  जो पेड़ बना , था कभी वह अंकुर  जीवन की थाह कोई नाप न पाये !  पेड़ जो मरा तो रह जाएगा  अंकुर  फिर बन जाएगा वृक्ष विशालकाय ! पर्दे पर नाचतेContinue reading “हमें यह रहस्य कौन समझाये?”
  • आज को संवारिये
    जीवन नित नया, जो बीत गया  सो बीत गया! बीती बात बिसारिये  आज को  संवारिये,  अतीत की गठरी उतारिये  स्वयं को यूँ  ही न मारिये, आज को जियो होकर मुक्त  यूँ ही न हो जाये वह लुप्त,  आज की संभावनाएं असीमित  न कर ख़ुद को तूँ सीमित, स्वच्छंद भाव से जी हर पल  तभी सुनहराContinue reading “आज को संवारिये”
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