चाय की भी क्या ग़ज़ब कहानी है
चाय से ही तो रगों में रवानी है !
चाय की है दीवानी सारी दुनिया
बच्चू चाचा हों या फिर हो मुनिया !
चाय है तो हमारी शामें रंगीन हैं
चाय न कोई पूछे तो तौहीन है !
चाय से है यारों की महफ़िल सजती
ख़ुशबू चाय की मानो शहनाई हो बजती!
चाय ने कितने रिश्तों को बाँध के है रखा
बहुत खोया जिसने इसका स्वाद है न चखा!
चीन हो या जापान या हो भारत महान
लेकर चाय की चुस्की वृद्ध बन जाते जवान !
न होती चाय की खेती, न इसकी तिजारत
तो कितनों के पेट से होती रोटी नदारद !
चाय न होती तो सफ़र कैसे बनते यादगार
कैसे होते मधुर स्मृतिओं के घोड़े पर सवार !
चाय दिवस पर जो करे इसकी महिमा का बखान
पुण्य का भागी बने, सदैव हो उसका कल्याण ! 😊
अरुण भगत
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