मन विकल हो तो उसे ढाँढस बँधाइए
गर्त में निराशा की कभी न जाइए!
पग-पग मुश्किलें रोकेंगी रास्ता
विकराल बाधाओं से पड़ेगा वास्ता,
फ़न फैलाए मिलेंगे विषधारी नाग
चहूँओर होगी झुलसा देने वाली आग,
साहसी वही धैर्य का जिसके बाँध न टूटे
विषाद-संताप का उसके ज्वालामुखी न फूटे,
उफनती लहरों के बीच जो रहे अडिग अभय
भय के रहते न करे अपनी ऊर्जा का अपव्यय,
जीवन को बहुमूल्य जान जो जीता उसे भरपूर
विषय-विकारों से रखता अपनी नैया को दूर
वही कहलाता जीवन योद्धा, वही कहावे शूर!
अरुण भगत
सर्वाधिकार सुरक्षित
#arunbhagatwrites#poetry# poeticoutpourings#outpouringsof myheart#writer#Indianwriter#englishpoetry#hindipoetry#poetryofthesoul








