नव वर्ष हम सब के लिए और समस्त विश्व के लिए मंगलमय हो।
देखो आया नूतन वर्ष
गावो मंगल, मनाओ हर्ष
विकसित हो एक नई चेतना
मानव समझे मानव की वेदना
हर दिल में पनपे प्रेम अपार
हो सुंदर जग का स्वप्न साकार
सबल चरित्र हो, इरादे नेक
ह्रदय से हो जायें सब एक
न कोई कलह, न हो द्वेष
निर्मलता ही रह जाये शेष
क्यों न ले कर हाथों में हाथ
सब हो जाएँ अंतर्मन से साथ
सद्भाव का तरु हो जो पल्लवित
हर्षित हो धरा, हम सब हों गर्वित
अरुण भगत
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