वही कहलाता जीवन योद्धा

मन विकल हो तो उसे ढाँढस बँधाइए 

गर्त में निराशा की कभी न जाइए! 

पग-पग मुश्किलें रोकेंगी रास्ता 

विकराल बाधाओं से पड़ेगा वास्ता, 

फ़न फैलाए मिलेंगे विषधारी नाग 

चहूँओर होगी झुलसा देने वाली आग, 

साहसी  वही धैर्य का जिसके बाँध न टूटे 

विषाद-संताप का उसके ज्वालामुखी न फूटे,  

उफनती लहरों के बीच जो रहे अडिग अभय  

भय के रहते न करे अपनी ऊर्जा का अपव्यय,  

जीवन को बहुमूल्य जान जो जीता उसे भरपूर 

विषय-विकारों से रखता अपनी  नैया को दूर 

वही कहलाता जीवन योद्धा, वही कहावे शूर! 

अरुण भगत 

सर्वाधिकार सुरक्षित

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

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