समय बीतता है और समय के साथ हम भी बीतते रहते हैं फिर एक दिन बिल्कुल ही बीत जाते हैं फिर रह जाती हैं समृतियां खट्टी-मीठी, खोटी-खरी , जैसे-जैसे और समय बीतता है समृतियां भी धुंधलाने लगती हैं और फिर एक दिन बिल्कुल ही बिसर जाती हैं ग़ायब हो जाती हैं मानस-पटल से मानो कभीContinue reading “कहाँ है अमरत्व ?”
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मुझे उस जहाँ की तलाश है
मुझे उस जहां की तलाश है जहाँ खुश्क बंजर ज़मीं नहीं दिल का दिल से सरोकार है जहाँ हर ओर पनपती हैं मुहब्बतें फ़न सब को दरकार है सच के लिए खड़े होते लोग जहाँ झूठ फ़रेब नागवार है इंसान इंसान के साथ खड़ा न कोई छोटा न कोई बड़ा जहाँ मिट गईं हैं सरहदें Continue reading “मुझे उस जहाँ की तलाश है”
उसने जो मेरे दर्द को—
Dedicated to my decidedly better half on her birthday. God bless her! उसने जो मेरे दर्द को अपना बना लिया उसकी इसी अदा पर मैं फ़िदा हो गया वो जो तूफ़ानों में खड़ी हुआ मेरे साथ लगा कि खुदा ने सर पे रख दिया हाथ यूँ तो ज़िंदगी जैसे तैसे हो ही रही थी बसर Continue reading “उसने जो मेरे दर्द को—”
खुदा खैर करे
इस ज़माने में कहाँ लेंगे जा कर पनाह प्यार मोहब्बत की बात यहाँ बन गई गुनाह जहाँ हर कोई रखता है दिल में वैर वहाँ कौन लगे अपना, सब लगें हैं ग़ैर जहाँ अपने आप में डूब गया है हर बशर वहाँ क्योंकर हो किसी का किसी पे असर एक अंधी दौड़ में सबContinue reading “खुदा खैर करे”
क्या बात हो —
क्या बात हो ग़म सारे ख़्वार(तबाह) हो जाएँ ख़ुशिओं का पकड़ें दामन, बेड़ा पार हो जाए क्या बात हो हम खुली किताब बन जाएँ दिल में हो सकूँ, ज़िंदगी झूम के गाये क्या बात हो ज़लज़ले भी हौंसला तोड़ न पाएँ जहाँ भी जाएँ, सर उठा के बे-ख़ौफ़ ही जाएँ क्या बात हो कि रूहContinue reading “क्या बात हो —”
A Point to Ponder
सोचो तो सलवटों से भरी है तमाम रूह देखो तो एक शिकन भी नहीं है लिबास पर As the poet says above, many of us are so immaculately and impeccably dressed, often in branded clothes, if we can afford them, with not a wrinkle in sight. We make every attempt to look flawlessly smart andContinue reading “A Point to Ponder”
कभी तो —
क्यों न दें मिल कर इंसानियत का हवाला तभी तो घुप अंधेरा छटेगा, होगा उजाला क्यों न हम सब मिल कर दें दुआएँ किसी को न दें दर्द, न किसी को रुलायें क्यों न मज़लूमों की ओर हाथ हम बढ़ायें ज़ुल्म-ओ-तशद्दुद , ज़ोर-ज़बर से बाज़ आयें जंगों के पढ़ क़सीदे क्यों दुनिया को भरमायें क्योंContinue reading “कभी तो —”
On Redeeming Our Humanity
If we have to hate someone, Let us hate ourselves for all our pettiness, All our narrow confines of the heart, All our self-love bordering on insanity, All our callous disregard for various life forms, All the thuggery of our knavish mind, All the priceless things we have taken for granted, All our inflated egoContinue reading “On Redeeming Our Humanity”
Choose Wisely, Choose Well
Mind is its own place, and in itself can make a heaven of hell, a hell of heaven… -John Milton Choose Wisely, Choose Well Feed your mind hell And the hell hole will be Of your own making With none else to blame. Feed your mind good And the heaven will be Yours for theContinue reading “Choose Wisely, Choose Well”
जब जागो, प्यारे —
जब जागो, प्यारे , तभी सवेरा देखो दिन है कितना सुनहरा उमड़ घुमड़ कर बादल आते अमृतमय वर्षा ये लाते देखो पंछी मल्हार हैं गाते उमंगें आशाएँ फ़िज़ा में तिरतीं मस्त मलंग हवा है फिरती वनस्पति पुलकित हो झूमे आओ आनन्दित हो हम घूमें तितलियाँ फूलों पर मंडरातीं मकरंद सेवन कर इठलातीं प्रकृति नेContinue reading “जब जागो, प्यारे —”