दे जीवन को एक नवीन गति

जीवन पथ पर बढ़ता जा  गीत सुख समृद्धि के गा  जीवन एक अनमोल निधि  अगर तूँ जाने जीने की विधि  इसे कदापि न व्यर्थ गवाँ  जाने कब यह हो जाये हवा  यह पल ही है तेरा अपना  बाक़ी सब तो है एक सपना  जागृत हो इस क्षण के प्रति  दे जीवन को एक नवीन गति Continue reading “दे जीवन को एक नवीन गति”

कल ही तो आया था

कल आया था और आज ही गया  बे-वफ़ा कहीं का ये साल भी गया  यूँ ही बीत जाती ज़िंदगी ख़्वाब जैसी  ढहे जाते रेत के इक नाज़ुक घर जैसी  यूँ ही तो गुज़र जाता है ये सफ़र  तमाम  पलक झपकते आ जाता आखरी मुक़ाम  सामने इक समंदर, कहाँ इसका किनारा  ख़ुद इसमें उतरना, कोई नContinue reading “कल ही तो आया था”

ज़िंदगी

ज़िंदगी जीना आसान थोड़ी है  कितने सवाल खड़े रहते हैं मुँह बाये गहराते रहते है हैं कितने स्याह साये  कितनी मंज़िलें देती रहती हैं सदायें  कितनी चाहतें लेती रहती हैं बलायें  वक्त थोड़ा, उम्मीदों की फ़ेहरिस्त लंबी कहाँ मिले है कोई हमख्याल साथी संगी  यूं ही भाग-दौड़ में ज़िन्दगी गुज़र जाती है  रेत की मानिंदContinue reading “ज़िंदगी”

सुनो—

सुनो, क्या बोलते हैं चाँद तारे , कुदरत के अद्भुत नज़ारे, कुछ कह रही है हर शाख, चिता की सुलगती राख , कुछ बोलता है बहता पानी जिसका नहीं कोई सानी , कुछ कह रहा है सघन वन, बोल रहा तुम्हारा अंतर्मन , बोल रही है हर दिशा , कुछ बाँच रही गहरी निशा, धिक्कारContinue reading “सुनो—”

कहाँ है अमरत्व ?

समय बीतता है  और समय के साथ हम भी बीतते रहते हैं  फिर एक दिन  बिल्कुल ही बीत जाते हैं  फिर रह जाती हैं समृतियां खट्टी-मीठी, खोटी-खरी , जैसे-जैसे और समय बीतता है  समृतियां भी धुंधलाने लगती हैं  और फिर एक दिन  बिल्कुल ही बिसर जाती हैं  ग़ायब हो जाती हैं मानस-पटल से  मानो कभीContinue reading “कहाँ है अमरत्व ?”

मुझे उस जहाँ की तलाश है

मुझे उस जहां की तलाश है  जहाँ खुश्क बंजर ज़मीं नहीं  दिल का दिल से सरोकार है  जहाँ हर ओर पनपती हैं मुहब्बतें  फ़न सब को दरकार है  सच के लिए खड़े होते लोग जहाँ झूठ फ़रेब नागवार है  इंसान इंसान के साथ खड़ा  न कोई छोटा न कोई  बड़ा  जहाँ मिट गईं हैं सरहदें Continue reading “मुझे उस जहाँ की तलाश है”

उसने जो मेरे दर्द को—

Dedicated to my decidedly better half on her birthday. God bless her!  उसने जो मेरे दर्द को अपना बना लिया  उसकी इसी अदा पर मैं फ़िदा हो गया  वो जो तूफ़ानों में खड़ी हुआ मेरे साथ  लगा कि खुदा ने सर  पे रख दिया हाथ  यूँ तो ज़िंदगी जैसे तैसे हो ही रही थी बसर Continue reading “उसने जो मेरे दर्द को—”

खुदा खैर करे

इस  ज़माने में कहाँ लेंगे जा कर पनाह प्यार मोहब्बत की बात यहाँ बन गई गुनाह जहाँ हर कोई रखता है दिल में वैर वहाँ कौन लगे अपना, सब लगें हैं ग़ैर  जहाँ अपने आप में डूब गया है हर बशर   वहाँ क्योंकर हो किसी का किसी पे असर  एक अंधी दौड़ में सबContinue reading “खुदा खैर करे”

क्या बात हो —

क्या बात हो ग़म सारे ख़्वार(तबाह) हो जाएँ  ख़ुशिओं का पकड़ें दामन, बेड़ा पार  हो जाए  क्या बात हो हम खुली किताब बन जाएँ  दिल में हो सकूँ, ज़िंदगी झूम के गाये  क्या बात हो ज़लज़ले भी हौंसला तोड़ न पाएँ  जहाँ भी जाएँ,  सर उठा के बे-ख़ौफ़ ही जाएँ  क्या बात हो कि रूहContinue reading “क्या बात हो —”

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