सफल होगा दुर्लभ जीवन तेरा

मन, तू हिम्मत न हार

अपने भय पर कर प्रहार

हो जाएगा बेड़ा पार

निर्भयता की जोत जला

टल जाएगी हर एक बला

आत्मविश्वास का बना सेतु

कुछ न कर पाएँगे राहु-केतु

दृढ़ निश्चय कर बढ़ जा आगे

देख कैसे सब संशय भागें

तेरे घट में बैठे प्रभु राम

रमा ले मन में उनका नाम

उनकी कृपा को बना ले ढाल

कोई न कर सके बाँका बाल

सद्कर्मों का उद्घोष तू कर

हर सद्गुण को निश्चय कर वर

सबल चरित्र के भर जीवन में रंग

दैवी शक्तियाँ हो लेंगी तेरे संग

ख़त्म होगा भय-भ्रम का फेरा

सफल होगा दुर्लभ जीवन तेरा !

अरुण भगत

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होंगे तुम्हारे ये धरा और गगन

निर्भय हो आगे बढ़ो

सत्य सीढ़ी पर चढ़ो

निष्ठा को बनाओ ढाल

असत्य का बेंधो हर जाल

अहंकार पर करो प्रहार

स्वार्थ न हो सर पर सवार

कायर बन न हर दिन मरो

न अकारण ही तुम डरो

ज्ञान का दीपक जलाओ

जीवन को सार्थक बनाओ

बलिष्ठ बनो और बनो समर्थ

अमूल्य जीवन न हो जाए व्यर्थ

हर बाधा को तुम जाओ लांघ

उज्जवल भविष्य की है यह माँग

जीवन सिंधु में उतारो नाँव

हो हर तूफ़ान से लड़ने का चाव

सुलझाओ जीवन के उलझे धागे

निर्भय हो तुम बढ़ जाओ आगे

रक्षा के लिए जो लगाए गुहार

हर उस दीन की सुनो पुकार

रखो दृढ़ निश्चय, सच्ची लगन

होंगे तुम्हारे ये धरा और गगन

अरुण भगत

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दोस्त, फ़ुरसत में कभी आना तुम

दोस्त, फ़ुरसत में कभी आना तुम

सकूँ भरे लम्हे साथ लाना तुम

इत्मीनान से बातें दो-चार करेंगे

ज़िंदगी के कैनवस में नए रंग भरेंगे

पुरानी मीठी यादें ताज़ा करेंगे

मिल बैठ उनमें इक नई रूह भरेंगे

ठंडे पड़ गए रिश्तों में फूँकेंगे नई जान

मिल जाए जैसे हीरों की कोई ख़ान

आबाद करेंगे फिर दिल की वीरां बस्ती

पहले सी ही मौज करेंगे, थोड़ी सी मस्ती

आओगे जब ओढ़कर प्यार का लबादा गर्म

सख़्त पड़ गए एहसास भी शायद हो जाएँ नर्म

आओगे तो जाग जाएँगी सोई हुई ये रातें

तारों भरे आसमाँ से जब मिल करेंगे बातें

दोस्त, फ़ुरसत में ज़रूर कभी आना तुम

गर्मजोशी की सौग़ात साथ लाना तुम

अनकहे क़िस्सों को मिल जाएगी ज़ुबान

ज़िंदगी हासिल करेगी इक बेहतरीन मुक़ाम

अरुण भगत

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You Live Only When—

You live only

When you live a life of passion

When you cast things in your own fashion

When you live with intensity

And that intensity becomes your propensity

You live only

When you have a mind of your own

When all your dithering and self-doubts are gone

When you have clarity of vision

And to realise that vision becomes your mission

You live only

When you are spurred on by lofty dreams

And you are moved by rich themes

When you are determined to build a better world

And to that end your lions up you gird

You live only

When you make positivity your touchstone

When you refuse to grumble, groan and moan

When you always see at the end of the tunnel the light

And for everything good and bright you doggedly fight

You live only

When of every passing moment you are aware

When in the moment you live and by it you swear

When mindful living becomes your constant refrain

And towards that goal your mind you assiduously train

You live only

When you are honest and loving to the core

When of life you ask nothing more

When you become a beacon of glowing light

And paint the world in colours vibrant and bright!

Arun Bhagat

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शून्य और शून्य के बीच

जीवन एक छोटा सा अंतराल ही तो है

शून्य और शून्य के बीच, शाश्वत मौन और मौन के बीच,

फिर इसको लेकर इतना कोहराम क्यों,

कोलाहल क्यों ?

कहाँ ले जाएगी यह सरपट दौड़, क्या पा लेंगे,

क्या पास रह जाएगा,

क्यों चिंता हैं खोने की जब अपना कुछ है ही नहीं ?

जब कुछ साथ लाए ही नहीं और न ही ले जाएँगे

तो फिर क्या पाना और क्या खोना, किस बात का विषाद और विवाद?

किसी से क्या जीतना है और क्या है हारना?

जब हार-जीत का कुछ प्रयोजन ही नहीं,

तो हारने पर अपमान कैसा और जीतने पर उन्माद क्यों?

जो कुछ भी दिखता है जब नश्वर है

तो उससे लगाव क्यों, उसके प्रति आसक्ति कैसी?

जीवन एक स्वप्न मात्र ही तो है, अस्थाई और क्षणभंगुर,

तो उसे ले इतने विह्वल क्यों, उत्तेजित क्यों?

यही प्रश्न हमें ले जाएँगे विरक्ति के मार्ग पर, अंतर्मन के मौन के गर्भ में,

और वहीं से आरंभ होगी हमारी शाश्वत मौन की दिशा में वापसी यात्रा!

अरुण भगत

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There are Still More Skies to Reach

Age is just a number

Get out of your slumber

Don’t let age weigh you down

Don’t on passing years frown

You are what you think you are

Gird up your loins, you will yet go far

What matters is your spirit gung-ho

There are still miles upon miles to go

There are still more skies to reach

You have still so much to learn and teach,

And to soak in the beauty of many a sun-kissed beach.

Don’t please go out with a whimper,

Did you get the gift of life to whine and simper?

To make the most of what you have you were born

To live life to the hilt you are sworn

Chart you course through life after your fashion

Live every moment with zeal and passion.

Your life is a jewel in the crown,

Why should you then in wanton sorrow drown?

Plunge into the vortex of life with all your might

Be a doughty warrior and till the last breath fight

Fight with all you have for greater glory

Let through the annals of time ring your fascinating story!

*Dedicated to all my friends who like me are getting on in years but whom I will love still more if they think of themselves as senior teenagers!😊

Arun Bhagat

All rights reserved

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क्यों?

ख़ाली हाथ आए,

ख़ाली हाथ जाना,

भाग मृगतृष्णाओं के पीछे

कुछ नहीं है पाना,

अटल सत्य से हम

सब दूर भागते,

रहते सोए,

कभी न जागते,

भ्रम में जीते,

भ्रम में मरते,

आलिंगन सत्य का

कभी न करते,

यूहीं दौड़ती

विकारों की गाड़ी,

यूहीं उलझाती

अज्ञानता की बाढ़ी,

यूहीं मद

सिर चढ़ कर बोलता,

पट ज्ञान के

कभी न खोलता,

यूहीं जीवन का

चलता मेला,

यूहीं खेलती

माया खेला,

क्यों नहीं हम

स्वयं को संवारते,

क्यों मानव जीवन की

दुर्लभता बिसारते,

क्यों?

अरुण भगत

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मुझे गिला है उनसे

मुझे गिला है उनसे

जो सच को सच नहीं कहते

जो झूठ की मार को

चुप-चाप अनचाहे सहते

झूठ को जाने-अनजाने

वो देते बल

नहीं समझते कि

कड़वा होगा उसका फल

नहीं सोचते वो कि

झूठ का यूँ फैलेगा जाल

तो क्या होगी

हमारी गति, हमारा हाल

समय की यह माँग है कि

सच के साथ हों खड़े

अगर चाहते हम कि

लक्ष्य प्राप्त हों बड़े

सच को क्षीण करता

झूठ का हर वार

निस्तेज करती सच को

झूठ की हर मार

जान लें हम कि

यह है आर-पार की घड़ी

असत्य का छद्मजाल है

स्वयं में विपदा बड़ी

यदि समाज को देना चाहें हम

एक स्वस्थ दिशा

तो फिर छँट जानी चाहिए

असत्य की निशा

समय की यह पुकार है

सत्य को दें बल

अगर हम राष्ट्र- प्रहरी चाहें

मातृभूमि का स्वर्णिम कल

क्यों न हम यह मान लें

और लें यह जान

कि सत्य की नींव पर ही

खड़े होते राष्ट्र महान!

*जिन से मुझे गिला है उन में मैं स्वयं भी सम्मिलित हूँ

अरुण भगत

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आज से हर लम्हे को मनाते हैं

नये साल में नई सोच

आज से हर लम्हे को मनाते हैं

उसे अपने ख़्वाबों से सजाते हैं

सुरमई शाम से कुछ रंग चुराते हैं

उनसे अपनी क़िस्मत को लुभाते हैं

हर लम्हे को संवारना है हमारा फ़र्ज़

यह है ज़िंदगी का हम पर क़र्ज़

आओ इस क़र्ज़ को चुकातें हैं

उम्मीदों की शमा हर घर जलाते हैं

लम्हे में ही तो समाया है सब कुछ

इस बात को तुम जान लो सचमुच

लम्हों से ही तो है तारीख़ लिखी जाती

उन्हीं से सदियों की बुनियाद रखी जाती

लम्हों की कोख में ही है सब कुछ पलता

उन्हीं की बदौलत तो हर चिराग़ है जलता

लम्हों को ग़र अपनी बाहों में हम भर लें

उनकी बेपनाह अहमियत को घर कर लें

तो फिर रह जाएगा कुछ न पीछे न आगे

सुलझ जाएँगे पल में ही सब उलझे धागे

लम्हे की जानिब ग़र बढ़ाओगे अपने हाथ

सारी कायनात को खड़ा पाओगे अपने साथ

अरुण भगत

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नव वर्ष के लिए मंगल कामनाएँ! नव वर्ष आप सब के लिए शुभ, अर्थपूर्ण एवं आनन्दमय हो!

पल्लवित हों नई संवेदनाएँ

नया साल आएगा

ढेरों ख़ुशियाँ लाएगा

अंगड़ाई लेंगीं नयी उमंगें

उठेंगी मन में नयी तरंगें

अंतर्मन में बजेंगे ढोल-मंजीरे

खुल जाएँगी सब ज़ंजीरें

देखो वो अंधेरा गया

उग रहा है एक सूरज नया

ख़ुशी का परचम फहरायेगा

अंधेरा अब न गहराएगा

करो स्वागत एक नई सहर का

अब न डर हो किसी क़हर का

हर सुंदर सपने को करें साकार

आओ एक नई दुनिया को दें आकार

विषमताओं की कोई हो न जगह

मन बुझने की कोई हो न वजह

निष्कासित हों सब वेदनाएँ

पल्लवित हों नईं संवेदनाएँ

असत्य का हो मूल विनाश

हो सत्य का सर्वत्र प्रकाश

ऊसर धरती पर खिल जाएँ फूल

पथ पर न रह जाएँ कोई शूल

क्यों न हो जाएँ हम सब साथ

कदम बढ़ाएँ ले हाथों में हाथ

करें एक सर्वोत्तम दुनिया की रचना

जिस लिए हुई हमारी संरचना

अपनी नियति को साकार करें

स्व जीवन का उद्धार करें!

अरुण भगत

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