मत ढूँढ मरने के बहाने,
सुंदर भविष्य खड़ा है सिराहने,
यूँ बैठा शून्य में न तक,
तुझे भी जीने का है पूरा हक़,
असीमित सम्भावनाएँ हैं खड़ी पंख पसारे,
फिर क्यों ढूँढता है तूँ कमज़ोर सहारे?
उठ खड़ा हो, अपने सपनों को दे गति,
इस्तेमाल कर जो ईश्वर ने दी है मति!
घुप अंधेरे में भी ढूँढ निकाल कोई झरोखा,
अतुल्य है तूँ, कर दिखा कुछ अनोखा!
अर्थहीन सीमाओं में न खुद को बांध,
जो दीवारें तुझे रोकतीं, सबल बन उनको फाँद!
अमूल्य जीवन की निधि को यूँ न गवा,
बुलबुला है यह, कौन जाने कब हो जाए हवा?
स्वर्णिम अक्षरों में जीवन के पन्नों पे कुछ ऐसा लिख जा
कि विरला ही मिले कोई और प्रेरणा स्तोत्र तुझ सा!
ध्रुव तारे सा तूँ हो जा विद्यमान नभ में,
जीवन भँवर में खोए जहाज़ों को रास्ता दिखा तूँ जग में!
अरुण भगत