तू अब वो नहीं रहा जो हुआ करता था खूबसूरत ख़्वाब बुनता था हवाओं से बातें करता था फ़िज़ाओं में रस घोलता था प्यार के दो बोल बोलता था तू तो उम्मीद का दम भरता था बदलाव की बातें करता था तुझे ख़ुद पे इतना भरोसा था, तभी तो दुनिया संवारने का ख़्याल परोसा थाContinue reading “तू अब वो नहीं रहा”
Author Archives: Arun Bhagat
शिव भक्ति है परमानंद आदि शिव, शिव ही अंत हैं तेजोमय शिव, शिव प्रचंड हैं शिव भक्ति, शिव ही युक्ति शिव साधना, शिव ही मुक्ति कण-कण में शिव हैं व्याप्त शिव से होते सब साधन प्राप्त शिव करुणा, शिव ही क्षमा मुक्त होवे जो है शिव में रमा शिव ही मन, शिव ही बुद्धि शिवContinue reading
अनमोल लम्हे जो रह गए तेरे हाथ में
जो खो गया है वक़्त की गर्द में उसे न अब तलाश कर फिर कहाँ जीत पाया है कोई ऐसी बाज़ी हार कर जो गुम हो गया परछाईयों की भीड़ में उसे कहाँ है खोजता बना मुसाफ़िर किसी और जहां का अब कहाँ वो बोलता जो हो गया रुख़्सत कह अलविदा मीठी याद बन रहContinue reading “अनमोल लम्हे जो रह गए तेरे हाथ में”
A Tribute to my Nonagenarian Father Now that my father has entered the 99th year of his life, I feel like placing something on record about his remarkable life journey. You can learn from him how to soldier on in life despite heavy odds. Even after battling at least three life-threatening medical conditions from eachContinue reading
सोचता हूँ होंगी क़बूल इक दिन मेरी दुआएँ
मैं मोहब्बतों के दिलकश गीत गाता हूँ हर किसी को ख़ुद के क़रीब पाता हूँ हर कोई शख़्स मुझे है लगता अपना जैसे शीरे में भीगा कोई मीठा सपना हर किसी की रूह को देता हूँ आवाज़ इसी से करता हूँ रिश्तों का आग़ाज़ नहीं लगता है मुझे कोई भी ख़ुद से जुदा हर किसीContinue reading “सोचता हूँ होंगी क़बूल इक दिन मेरी दुआएँ”
ये कैसा उसका खेल है
ज़िंदगी का सफ़र बड़ा अजीब है कोई कोसों दूर कोई दिल के बहुत क़रीब है कोई तो रूह तक उतर के देता है बेपनाह राहत कोई नश्तर चुभो चुभो कर करता बेवजह आहत कोई ख़ुशबू बन के घुल जाता फ़िज़ाओं में कोई घोलता बदगुमानी का ज़हर हवाओं में कोई रूहानी रूह मस्त रहती अपनी फ़क़ीरीContinue reading “ये कैसा उसका खेल है”
कब?
खूबसूरत है वो लोग जो रंग भरते हैं रिश्तों में क्यों लगता है वो रह गए है सिर्फ़ क़िस्सों में क्यों बे-मुरव्वत सी हो गई है ये सारी दुनिया क्यों नहीं दिल खोल कर गाती अब कोई मुनिया क्यों अब कोई खिलखिला के नहीं हंसता क्यों कोई ख़ुशबू बन के दिल में नहीं बसता क्योंContinue reading “कब?”
अभी सितारों के साथ मेरा सफ़र बाक़ी है
मैं आसमां में उड़ता इक परिंदा हूँ मरा नहीं अभी मैं ज़िंदा हूँ अभी सितारों के साथ मेरा सफ़र बाक़ी है ख़्वाब मेरे नूरी हैं हस्ती चाहे मेरी ख़ाकी है अभी तो पार करनी हैं बहुत सी मंज़िले यूँ ही चलेंगे अभी ज़िंदगी के सिलसिले यूँ ही रहेगी ये अज़ीम जद्दोजहद ज़ारी यूँ ही बुलंदContinue reading “अभी सितारों के साथ मेरा सफ़र बाक़ी है”
देख तेरा दफन ज़मीर कहीं फिर न जी जाए
न बोल सच वरना रुसवाई होगी उसूलों की बात पे जग हसाई होगी बेगैरत दुनिया में न कर ग़ैरत की बात कौन जाने है यहाँ पाक दामन की जात अपने अख़लाक़ को कहीं कर आ दफन ओढ़ा दे ज़मीर को अपने हाथ से कफ़न झूठ सच का जहां हर फ़र्क़ खतम हो गया वो माशराContinue reading “देख तेरा दफन ज़मीर कहीं फिर न जी जाए”
A Bubbly Young Person Raring to Go
She is a bubbly young person Raring to go With a spring in her step And a sparkle in her eyes. I wonder what she is aiming for. Is she aiming for the sky Or something less or something more? Maybe she wants to reach out and touch The rainbow in the sky And batheContinue reading “A Bubbly Young Person Raring to Go”