सोचता हूँ …

सोचता हूँ कभी कुछ वक्त अपने लिए भी चुरा लूँ , पर वक्त भाग जाता है ज़िंदगी की उलझनों और  उठा-पटक में, आपा-धापी में! सोचता हूँ योजनाबद्ध तरीके से कुछ ठोस, कुछ सृजनात्मक करूँ , पर ज़िन्दगी रोज़ के रोज़  डाल देती है किसी इम्तिहान में , और मैं असमंजस में वक्त को अपने हाथोंContinue reading “सोचता हूँ …”

ज़िंदगी के नायाब तोहफ़े को यूं ना गवायें

ज़िंदगी के नायाब तोहफ़े को यूं ना गवायें  चलो हंसें और किसी और को भी हंसायें  जो गया है गिर उसे पकड़ बांह उठायें  फिर जी उठेगा वो और देगा दुआयें   जो मुफ़लिसी के मारे रोटी को है तरसता क्यों हमारा प्यार उस पर नहीं है बरसता  चलो पकड़ इक दूजे का हाथ आगेContinue reading “ज़िंदगी के नायाब तोहफ़े को यूं ना गवायें”

सृष्टि में प्रेम से बड़ी कोई सकारात्मक शक्ति और ऊर्जा नहीं है, प्रकृति का हर स्पंदन प्रेम से अभिप्रेरित और संचालित है, इसलिए आज  के दिन प्यार को समर्पित एक छोटी सी कविता 

प्यार है तो जहां है सारी ख़ुशी भी वहाँ हैं  प्यार है तो मीठे सपने  और लगते हैं सब अपने  प्यार है तो है असल पूजा  फिर रब अपना,नहीं वो दूजा  प्यार में जब फैलती  हैं बाहें  तो खुल जाती हैं सब बंद राहें  प्यार है जब जब बोलता  दिलों के दरवाज़े खोलता  जब प्यारContinue reading “सृष्टि में प्रेम से बड़ी कोई सकारात्मक शक्ति और ऊर्जा नहीं है, प्रकृति का हर स्पंदन प्रेम से अभिप्रेरित और संचालित है, इसलिए आज  के दिन प्यार को समर्पित एक छोटी सी कविता “

दिल को दिल की राह होती है

दिल को दिल की राह होती है  सब को प्यार की चाह होती है  दिल ही दिल की भाषा जाने  प्रेम से ऊपर वह कुछ न माने  दिल न हो तो दुनिया सूनी  जैसे विशाल ऊसर मरुभूमि  दिल ही तो है जो रिश्ते सींचता  जन को जन की ओर खींचता  दिल की भाषा सुमधुर औरContinue reading “दिल को दिल की राह होती है”

बांह पसार ऐसे जन को मिलिए

वे लोग अच्छे होते हैं  जो मन से बच्चे होते हैं  मन को यूँ भा जाते हैं  क्योंकि वे सच्चे होते हैं  इस कपटी दुनिया में  जो रह पाते हैं अबोध  वही जन ईश्वर को भाते  उन्हें है जीवनामृत का बोध  जो हैं सरल हृदय निष्पाप  छूता उन्हें न कोई संताप  जिस अनुकंपा को जगContinue reading “बांह पसार ऐसे जन को मिलिए”

नए साल की हो नई रीत

एक साल और बीता  कुछ खट्टा कुछ मीठा  कुछ रह गया रीता  कुछ ख्वाहिशें हुईं पूरी  कुछ रह ही गईं अधूरी  टूटे कुछ  सजीले सपने पराए हो गए जो थे अपने  कोई राह जाते पिछड़ गया   कोई जग छोड़  बिछड़ गया  जहाँ कुछ  नए रिश्ते मिले  पुरानों को खा गए गिले  जंगों के रह-रह शोलेContinue reading “नए साल की हो नई रीत”

मुझे गिला नहीं …

मुझे गिला नहीं कि तूँ बिछड़ गया  टीस ये है तूँ मेरा कभी था ही नहीं मैं जानता था की सच का रस्ता होगा दुश्वार  मगर तूँ उस राह का मुसाफ़िर कभी था ही नहीं  लगता  था मंज़िल-ए – मुक़्क़दस तेरे कदम चूमेगी  मगर तूँ उस मंज़िल का तलबगार कभी  था ही नहीं सोचता थाContinue reading “मुझे गिला नहीं …”

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