Let Your Life Be Interwoven With Grace

Live a life that is full to the brim, Don’t be deterred by things grim, Why not blaze a trail That inspires others without fail, Be a beacon light to those around When their inner demons them surround, When the storms of life buffet you no end, Stand tall and firm, don’t bend, When youContinue reading “Let Your Life Be Interwoven With Grace”

उमड़ते बादल, बहता पानी

उमड़ते बादल, बहता पानी, किसने इनकी महिमा जानी। बादल झूम-झूम कर बरसे, जब धरती पानी को तरसे, खेतों में फसलें लहलहायें, पशु पक्षी सब फिर जी जाएँ, धरा पे दौड़ जाए ख़ुशी की लहर, जैसे जी उठी हो ज़िंदगी जो गयी थी ठहर, पक्षी करें कलरव, नाचें मोर, हृदय हों पुलकित भाव-विभोर, मेघ जब हैंContinue reading “उमड़ते बादल, बहता पानी”

तभी बनेगा जीवन-योद्धा

चल चला चल, चल चला चल, रुक न तू एक पल। समय की धारा की भाँति बहता जा, सब कुछ सुनता और सहता जा, कुछ नयी सीख ले हर पल से, प्रेम से सब को जीत, तू गा ख़ुशी के गीत, क्या जीता जो जीता बल से। आशाओं की ओढ़नी ओढ़, हर बेड़ी को तोड़,Continue reading “तभी बनेगा जीवन-योद्धा”

न जाने कहाँ थमेगी…

कहाँ गया वो सब अमन चैन, जब दिन थे ख़ुशनुमा और सकूँ भरी थी रैन, जब बादल बरसते थे दिल खोल कर, जब हर बात न करनी पड़ती थी तोल कर, जब मोर की तरह पंख खोले था दिल नाचता, जब दिल का दिल से था क़ायम पूरा राब्ता, तब मानो पंख लगाकर उड़ जातेContinue reading “न जाने कहाँ थमेगी…”

ज़िंदगी की अधूरी कहानी

प्रतिदिन सपने लेते आकार, उनमें से कुछ ही होते साकार, बहुत से समय की गर्त में जाते खो जैसे बुझ जाए जलती हुई कोई लौ, पर होते हैं कुछ ऐसे अपूर्ण सपने जो लगें हमें बहुत अपने, वे रह जाते बन कर एक टीस मन में जैसे चुभता हो कोई शूल तन में, ज़िंदगी मेंContinue reading “ज़िंदगी की अधूरी कहानी”

कहाँ लुप्त हो गए…

कहाँ लुप्त हुए वो अमन चैन के दिन, जब जीवन की न कर सकते थे परिकल्पना प्रेम बिन, जब जीवन लगता था सारगर्भित, जब सनेह के पुष्प होते थे पल्लवित, जब मन में उठती थी उल्लास की तरंग मानो आकाश में झूमती नाचती मस्त कोई पतंग, सादा जीवन, प्रगाढ़ सम्बंध, सुंदर गीत, बिना जीत केContinue reading “कहाँ लुप्त हो गए…”

सब कुछ ख़ुदा पे छोड़ दे

मन में यह मलाल क्यों, चेहरे पे ये सवाल क्यों, कहाँ मिलेंगे तुझे जवाब, होता है हलकान क्यों? जान ले तू यह आज, यहाँ राज़ में हैं दफ़न राज़, कहाँ परतों को तू हटाएगा, इसी तिलस्मी जाल में उलझ जाएगा, न खड़े कर इतने सवाल, न बन जा खुद ही अपने जी का जंजाल, डालContinue reading “सब कुछ ख़ुदा पे छोड़ दे”

स्वयं को करो सिद्ध

चलो उठो, हाथ बढ़ा कर छू लो, यह विस्तृत गगन तुम्हारा है, इसी सोच ने बहुतेरों का जीवन संवारा है, चलो, हो जाओ लहरों पर सवार, दिखता है दूर जो क्षितिज, वह भी तो तुम्हारा है, आगे बढ़ने वालों को रुकना कहाँ गवारा है? चंद्रमा के घोड़े पे सवार बढ़ जाओ तारों की ओर, कौनContinue reading “स्वयं को करो सिद्ध”

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