सादा जीवन, उच्च विचार,
निर्मल मन, उत्तम व्यवहार,
सादा व्यक्ति सब से न्यारा,
ईश्वर को वह सबसे प्यारा,
जो सीधा-सादा और हो नेक,
उसके पास अमूल्य निधि है एक,
लोग चाहे हों उसपे हंसते,
उसके संग प्रभु हैं बसते,
उसकी सुध हैं ईश्वर लेते,
दोनो हाथों से उसको देते,
उसपर समस्त सृष्टि की छाया,
यही तो है सादगी की माया,
सादे की प्रभु रखते लाज,
उसके संवारें वह सब काज,
ज्ञानी जनों का यह कहना,
सादगी से बड़ा न कोई गहना,
कपटियों का चले चाहे कितना भी ज़ोर,
सादगी से बढ़कर नहीं कुछ और,
जिसने इस सत्य को है जाना,
सफल उसी का जाग में आना!
अरुण भगत
स्वरचित रचना
सर्वाधिकार सुरक्षित
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