Be A Viewer of the Eternal Flitting Show

Do not to anything try to hold fast,

As nothing will forever last,

Joys and sorrows come and go,

Be a viewer of the eternal flitting show,

When the shadow of impermanence everything chases,

When even the grandest edifice built time razes,

When everything vanishes like a passing cloud,

Why should any attempt to cling your thinking shroud?

View the goings-on in life with dispassion,

As transience casts everything after its fashion.

As the moving shadows flit past,

As the whirring reel of life moves fast,

Watch the advancing and retreating waves from the shore,

Be an uninvolved witness, don’t ask for anything more!

Arun Bhagat

All rights reserved

#arunbhagatwrites#poetry# poeticoutpourings#outpouringsof myheart#writer#Indianwriter#englishpoetry#hindipoetry#poetryofthesoul

सीखें खुद ही के साथ जीना

अपना दर्द खुद से बाँटें,

खुद ही चुनें राह के काँटे,

खुद ही सिएँ अपना चाक सीना,

सीखें खुद ही के साथ जीना,

खुद ही ज़ख्मों पे मरहम लगाएँ,

खुद ही बलाओं को दूर भगाएँ,

खुद ही करें खुद का मुआयना,

खुद ही दिखाएँ खुद को आईना,

कौन आएगा तुम्हारा हाथ थामने,

कौन आएगा तुम्हारा हाल जानने,

कौन आएगा तुम्हें सकूँ देने,

कौन आएगा तुम्हें आग़ोश में लेने,

किस को अब फ़ुरसत अपने दीदार से,

क्या लेना किसी को अब विसाल ए यार से,

सब अब खुद को ही भरमा रहे,

खुद की तारीफ़ खुद से ही फ़रमा रहे,

तुम भी अब पकड़ो अपनी राह,

न रखो किसी से कुछ पाने की चाह!

अरुण भगत

#arunbhagatwrites#poetry# poeticoutpourings#outpouringsof myheart#writer#Indianwriter#englishpoetry#hindipoetry#poetryofthesoul

हर इक पर बरसती उस रब की रहमत

ज़र्रे-ज़र्रे में मेरे राब की निगाहे करम है,

कौन कहता है, उस पे ज़्यादा और मुझ पे कम है,

चप्पे-चप्पे पे दिखता है उसका नूरी जलाल,

फिर क्यों हो उसको ले मन में कोई शुबहा या मलाल,

हर इक पर बरसती उस रब की रहमत,

क्यों न इसको समझने की करते हम ज़हमत,

क्यों न करते उसकी रहमतों का शुक्र,

क्यों बनाते अपनी ज़िंदगी को मैदान-ए-कुफ़्र,

क्यों उसकी चौखट पे सजदे हम न करते,

क्यों उसके नायाब तोहफ़ों का दम हम न भरते,

क्यों नापाक ख़्वाहिशों की आग में हम हैं जलते,

क्यों उसकी दिखाई नेक राह पे हम न चलते,

क्यों अपनी दग़ाबाज़ियों से मुश्किल बनाते अपने रास्ते,

क्यों नहीं पाक रखते अपना दामन ख़ुदा के वास्ते!

अरुण भगत

#arunbhagatwrites#poetry# poeticoutpourings#outpouringsof myheart#writer#Indianwriter#englishpoetry#hindipoetry#poetryofthesoul

किसी का आस-पास होना ही बहुत है

किसी का आसपास होना ही बहुत है,

चाहे न बतियाएँ, अपनी-अपनी व्यस्तताओं में रह जाएँ,

चाहे हो जाएँ खिन्न, और एक दूसरे पर गर्माएँ,

चाहे इम्तिहान लेते-लेते एक दूसरे का उकता ही जाएँ,

पर किसी का पास होना ही बहुत है,

यह तब पता लगता है जब वह जाए कहीं दूर,

जब ख़ालीपन खड़ा हो मुँह बाएँ और रहा हो घूर,

जब लगे समय जैसे गया है ठहर,

अधिक लम्बा सा होता जाए हर पहर,

जब न दे कोई दिल के द्वार पर दस्तक,

जब लगे जैसे शून्य हो गया हो मस्तक,

तब पता लगता है किसी का पास होना ही बहुत है!

कैसा यह विधि का विधान, कैसा यह अज्ञान,

जब पास हो तो किसी के मूल्य का न हो संज्ञान,

और जब हो दूर तो लगे जैसे खो दी हो अमूल्य निधि,

लेकिन होता यह तभी है जब न जानें हम जीने की विधि,

जब जो मिल जाए लगे तुच्छ, और खो जाने पर लगे सोना,

यही तो है अज्ञानता की त्रासदी और नासमझी का रोना!

जिसने ज्ञान चक्षु खोल के हर पल और सम्बंध को है जिया,

मंगल हुआ है उसका, जीवन सुधा को उसी ने है पिया!

अरुण भगत

सर्वाधिकार सुरक्षित

#arunbhagatwrites#poetry# poeticoutpourings#outpouringsof myheart#writer#Indianwriter#englishpoetry#hindipoetry#poetryofthesoul

सत्य तो रहता सदा अजय

सत्य की होती असत्य पर विजय,

क्योंकि सत्य तो रहता सदा अजय,

सत्य न होता खंडित, न अविभाजित,

न होता वह कभी पस्त, न पराजित,

सत्य का तेज, सत्य की गरिमा,

बाँच न सके कोई उसकी महिमा,

सत्य तो है अविचल लोह- स्तम्भ,

पराजय का मुँह देखें असत्य और दम्भ,

जग जननी है सदा सत्य की रक्षक,

मार गिराए अन्यायी और भक्षक,

सत्य को दिव्य बल देती माँ शक्ति,

सद्कर्म से आगे न कोई भक्ति,

सत्य मार्ग पर जो निर्भय चलता,

भगवती कृपा से फूलता-फलता!

अरुण भगत

सर्वाधिकार सुरक्षित

#arunbhagatwrites#poetry# poeticoutpourings#outpouringsof myheart#writer#Indianwriter#englishpoetry#hindipoetry#poetryofthesoul

पल में बसती सारी सृष्टि

बीती बात बिसारिए,

अपना आज संवारिए,

बीत गया जो कल,

कभी न लौटेगा वह पल,

जो समय के गर्त में खो गया,

अतीत का भाग वह हो गया,

उसको लेकर न समय गँवाइए,

इस पल में सार्थकता पाइए,

जीवन इस पल में सिमटा,

सम्पूर्ण अर्थ इस में है लिपटा,

इस में है जीवन का सार,

इस में सम्भावनाएँ अपार,

यही लगाएगा बेड़ा पार!

पल की जो महिमा जाने,

पल को ही वह सब कुछ माने,

पल में उद्गम, पल में प्रलय,

पल में विघटन, पल में विलय,

पल में बसती सारी सृष्टि,

पल में मिलती व्यापक दृष्टि,

इसे न जानें सत्य अल्प,

पल कर सकता कायाकल्प,

पल को जानिए अमूल्य निधि

पले जिसके गर्भ में जीवन विधि!

अरुण भगत

सर्वाधिकार सुरक्षित

#arunbhagatwrites#poetry# poeticoutpourings#outpouringsof myheart#writer#Indianwriter#englishpoetry#hindipoetry#poetryofthesoul

रुकने का यहाँ क्या काम?

मुश्किल है अलविदा कहना,

मुश्किल है जुदाई का दुःख सहना,

पर ज़िंदगी तो है चलने का नाम,

रुकने का यहाँ क्या काम?

चाहे हमें एक दूसरे पर कितना भी प्यार क्यों न हो आता,

वक़्त का बहाव हम सब को है बहा ले जाता,

ले जाता हमें नयीं मंज़िलों की ओर,

करिए इस बात पर ज़रा गौर,

समय की नाव पर सवार,

न जाने कहाँ जा उतरेंगे पार,

पीछे छोड़ी जो रिक्तता, वह भी भर जाएगी,

नियति चुप-चाप अपना काम कर जाएगी,

फिर क्यों करें रोकने की कोशिश, क्यों रोएँ और रुलाएँ,

क्यों न प्रियजनों को दें शुभ आशीष और मिल उन संग उत्सव मनाएँ,

क्यों न उन्हें ख़ुशी से करें विदा, लेकर उनकी बलाएँ?

अरुण भगत

सर्वाधिकार सुरक्षित

#arunbhagatwrites#poetry# poeticoutpourings#outpouringsof myheart#writer#Indianwriter#englishpoetry#hindipoetry#poetryofthesoul

बेटियाँ माँ-बाप की जान हैं होती

बेटियाँ माँ-बाप की जान हैं होती,

उनके दिल की ज़ुबान हैं होती,

उनके दम से होता रौशन गुलज़ार,

उनकी ख़ुशबू से महके संसार,

मीठे प्यारे उनके बोल,

कोई आंक सके न उनका मोल,

अपना धीरज वो कभी न खोतीं,

घर कुनबे की शान वो होतीं,

कुदरत का नायाब तोहफ़ा उन्हें मानो,

उस रब की ख़ास मेहर उन्हें जानो,

जहां वो अपना परचम फहरातीं,

बसती वहीं ख़ुशियाँ, फसलें लहरातीं,

बेटियाँ बचाने का न करो गुमान,

बख्शो इज़्ज़त उन्हें, करो ख़ुद पे एहसान,

घर-दुनिया की वो होतीं जान,

मोहब्बत करो उनसे, करो उन पे मान!

बेटियों के इस मुबारक दिन पर सभी नायाब बेटियों को को समर्पित

अरुण भगत

#arunbhagatwrites#poetry# poeticoutpourings#outpouringsof myheart#writer#Indianwriter#englishpoetry#hindipoetry#poetryofthesoul

हवाओं से पूछा मैंने

हवाओं से पूछा मैंने,

कहाँ तुम रहतीं हमेशा उड़ती,

न पीछे देखतीं, न मुड़तीं,

अपने घोड़ों पे सवार,

आनंद मनातीं अपार,

नए शहरों को चूमतीं,

नए गावों में घूमतीं,

पहाड़ों के ऊपर इतरातीं,

सागर पर बल खातीं,

मरुस्थलों से जूझतीं

जबकि दुनिया तुम्हें पूजती,

न तुम्हारा कोई ठौर, न ठिकाना

आज यहाँ, तो कल कहीं और दिन बिताना,

क्यों नहीं तुम ठहरतीं,

जहां कोई बगिया हो महकती,

जहां रमणीक हो कोई स्थल,

क्यों नहीं रुकतीं वहाँ एक पल?

हंस कर बोली हवाएँ,

तुम नहीं समझते हमारा मर्म,

गतिमान रहना हमारा धर्म,

चलने में ही तो है अर्थ,

बाक़ी जानो सब व्यर्थ,

देखो, सम्पूर्ण ब्रह्मांड है चलता,

रुके का कभी कुछ नहीं है फलता,

जो रुका, कुचक्र में वह गया फँस,

मोह-माया के दलदल में वह गया धँस,

जो रुक गया, वह निम्न है भोगी,

सो सबसे उत्तम रमता योगी,

घाट-घाट का पानी पीता,

आनन्दमय जीवन वह जीता,

सारी दुनिया को वह जाने अपना,

उसका नहीं कोई संकीर्ण सपना,

व्यापक दृष्टिकोण का वह स्वामी,

उदार हृदय, विचार उसका दूरगामी,

चलने को तुम जीवन जानो,

रुकने को मृत्यु तुम मानो,

चलो, सामने व्यापक सत्य है फैला,

न रुको, न अटको, न करो चित मैला,

बढ़ जाओ नयी दिशाओं की ओर,

कल होगा नया उत्सव, होगी नयी भोर!

अरुण भगत

सर्वाधिकार सुरक्षित

#arunbhagatwrites#poetry# poeticoutpourings#outpouringsof myheart#writer#Indianwriter#englishpoetry#hindipoetry#poetryofthesoul

ग़म न कर, अभी बहुत कुछ करना है

ग़म न कर, अभी बहुत कुछ करना है,

हर दुश्वारी से जूझना है, हालातों से लड़ना है,

इस जद्दोजहद में ही तो है ज़िंदगी का मज़ा,

लहरायेगा तेरा परचम ग़र होगी रब की रज़ा,

न हिम्मत तूँ हार और ग़म न कर,

न घुट-घुट के बार-बार तूँ मर,

जाँबाज़ बन, शिद्दत से तूँ जी,

रुसवाई का भी हर प्याला मुस्कुरा के तूँ पी,

शिकस्त हुई है आज, तो कल होगी बेशक जीत,

यही दुनिया की रवायत , यही है इसकी रीत,

याद रख, ज़िंदगी तुम्हें आज़माएगी बार-बार,

सब्र से सह हर वार, बेड़ा होगा तेरा पार,

याद रख, तेरा ख़ुदा है हरदम तेरे साथ,

क्यों हो फ़िक्र ग़र सर पे है उसका हाथ,

और फिर तेरे साथ हैं बेशुमार दुआएँ,

तपती दुपहर में ज्यों ठंडी हवाएँ,

ग़म न कर, अभी बहुत कुछ करना है,

ज़िंदगी का प्याला अभी मायनों से भरना है!

अरुण भगत

#arunbhagatwrites#poetry# poeticoutpourings#outpouringsof myheart#writer#Indianwriter#englishpoetry#hindipoetry#poetryofthesoul

Design a site like this with WordPress.com
Get started