बीती बात बिसारिए,
अपना आज संवारिए,
बीत गया जो कल,
कभी न लौटेगा वह पल,
जो समय के गर्त में खो गया,
अतीत का भाग वह हो गया,
उसको लेकर न समय गँवाइए,
इस पल में सार्थकता पाइए,
जीवन इस पल में सिमटा,
सम्पूर्ण अर्थ इस में है लिपटा,
इस में है जीवन का सार,
इस में सम्भावनाएँ अपार,
यही लगाएगा बेड़ा पार!
पल की जो महिमा जाने,
पल को ही वह सब कुछ माने,
पल में उद्गम, पल में प्रलय,
पल में विघटन, पल में विलय,
पल में बसती सारी सृष्टि,
पल में मिलती व्यापक दृष्टि,
इसे न जानें सत्य अल्प,
पल कर सकता कायाकल्प,
पल को जानिए अमूल्य निधि
पले जिसके गर्भ में जीवन विधि!
अरुण भगत
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