*अहसास–ए–कमतरी के मारे हुए, ख़ुद ही ख़ुद से हैं हारे हुए, उन्हें कोई क्योंकर देगा शिकस्त, जिनके हौंसले यूँही हैं पस्त, अपनी नज़रों में जो ख़ुद को आंकें कम, ओढ़ लें जो बेवजह के ग़म, जिन पे कमतरी का गहरा साया है, उन्हें कब कोई समझा पाया है, ज़रूरी है ख़ुद में मुतमईन और भराContinue reading “ख़ुद ही ख़ुद से हैं हारे हुए”
Author Archives: Arun Bhagat
ख़ुद ही ख़ुद को न जानूँ
अपनी जद्दो-ज़हद से से होकर सुर्ख़-रू, मुद्दत बाद जब हुआ ख़ुद से रूबरू, तो अपने अंदर इक अजनबी पाया, ग़ज़ब उसके ढंग, अजब उसका साया, ख़ुद से ख़ुद की दूरी का अजब ही है क़िस्सा, कैसे इक नया ही शख़्स बन गया है मेरी रूह का हिस्सा, मुख़्तलिफ़ उसका चेहरा, निराली उसकी चाल, क्योंकर मैंContinue reading “ख़ुद ही ख़ुद को न जानूँ”
Listen When the Stars Tell Their Riveting Story
Listen when the universe to you does speak, In awe at its vastness take a peek, Listen when the stars tell their riveting story Which is simply awesome and hoary, Listen when the galaxies go singing their way, Listen to the primordial sound so profound and gay, Let the cosmic energy seep into your being,Continue reading “Listen When the Stars Tell Their Riveting Story”
फ़ौलाद है तूँ, कर फ़तह हासिल न ग़म कर, न हो उदास, है ज़िंदगी का अज़ीम तोहफ़ा तेरे पास, ख़ुदा के वास्ते न कर इसे ज़ाया, बड़ी मुश्किलों से इंसानी चोला तूने पाया, ज़िंदगी का प्याला जी भर के पी, न दम घोंट अपना, तूँ खुल के जी, ख़ुद को ख़ुदा का अक्स जान कर,Continue reading
कभी तो वो दिन आएगा
कभी तो वो दिन आएगा, जब दिल दिल की राह पाएगा, कभी तो देखेंगे वो सहर, ख़ुदा की जब बरसेगी मेहर, जब मोहब्बत न होगी रुसवा, इंसानियत का परचम लहराएगा, जब सच का होगा राज, और झूठ का होगा पर्दाफ़ाश, जब इंसाफ़ की तूती बजेगी, जब अमन की बगिया सजेगी, जब गुस्ताखी न होगी किसीContinue reading “कभी तो वो दिन आएगा”
पर फैला के मैं उड़ जाऊँ
मैं आसमानों को छूने को बेक़रार, असल तरक़्क़ी के लिए है यही दरकार, पर फैला के मैं उड़ जाऊँ, अपना मुस्तक़बिल रौशन कर पाऊँ, यही मेरी चाह, यही मेरा अरमान, और यही है ख़ुदा का फ़रमान, जहां औरत की इज़्ज़त, वहीं फ़रिश्ते बसते, उस माशरे के खुल जाते सब रस्ते, काँधे से तुम्हारे काँधा मिलाContinue reading “पर फैला के मैं उड़ जाऊँ”
अपने वतन से प्यार कर
गणतंत्र दिवस पर अपने प्यारे देश के हर बाशिंदे के नाम यह पैग़ाम अपने वतन से प्यार कर, इस पे जाँनिसार कर, जिसकी गोद में तूँ पला, उसपे क्यों न हो फ़ख्र भला, दिल से ख़िदमत इसकी कर, जी भर के इस पे नाज़ कर, जिस पाकीज़ा ख़ाक से तूँ बना, हो जा उस ख़ाकContinue reading “अपने वतन से प्यार कर”
इस लम्हे का कर तस्सवुर
गुज़रे वक़्त को न आवाज़ दे, वो न लौट कर आएगा, इस लम्हे का कर तस्सवुर१,इसी में सब कुछ पाएगा, माज़ी२ तो फ़ना हो गया, वक़्त के आग़ोश में सो गया, जो बीत गया सो बीत गया, गए लम्हों में वो खो गया, भूल जा उसकी ख़लिश३, नयी मंज़िलों की तलाश कर, ज़िंदगी में मायनोंContinue reading “इस लम्हे का कर तस्सवुर”
जीने की तमन्ना है तो खुल के जी
जीने की तमन्ना है तो खुल के जी, घुट-घुट कर जीने के लिए लोग हैं ना, मरना है तो इक बार शान से मर, रोज़ तिल-तिल मरने वाले लोग हैं ना, बनाना है तो सच को अपना हमसाया बना, झूठ का निवाला परोसने वाले लोग हैं ना, इबादत करनी है तो उस परवरदीगार की कर,Continue reading “जीने की तमन्ना है तो खुल के जी”
Love is the Elixir of Life
Love is a many-splendored flower, A flower that grows in a heart-warming bower, Its fragrance seeps into every pore of your being, It imparts to your soul a new way of seeing, It is the refuge to every lost soul, It has the magic to make a truncated self whole, It holds us all inContinue reading “Love is the Elixir of Life”