Do Not Let Bitter Memories Your Journey Mar When your travels take you wide and far, Do not let bitter memories your journey mar, Take life as it comes in your stride, Savour the miracles of this world vast and wide, Let the twinkling stars speak to you of wonderous things, Let the soaring oceanContinue reading
Author Archives: Arun Bhagat
ख़ुद को ही समझ बैठे ख़ुदा
देखता हूँ जब किसी का अंधा गुरुर, सोचता हूँ कैसा है यह ज़हरीला सरूर, जिसमें आदमी किसी को आदमी न जाने, हर किसी को वह बौना और गौण माने, ख़ुद को ही समझ बैठे ख़ुदा, और यूँही खुदाई से हो जाए जुदा, कितनों को यह ग़ुरूर है ले डूबा, फिर भी इस नशे से नहींContinue reading “ख़ुद को ही समझ बैठे ख़ुदा”
सुनो उनका गीत आँखें मूँदे
बारिश की जो गिरती बूँदें,सुनो उनका गीत आँखें मूँदे,आकाश से अमृत है बरसे,तृप्त हो धरती जो तरसे,मेह जो बरसें, वरदान मानिए,स्वयं को भाग्यवान जानिए,मेह रूप में प्रभु कृपा है बरसे,धन्य जानिए ख़ुद को मन से,गरजते बादल, मिट्टी सौंधी,मूल्य न जाने खोपड़ी औंधी,घिर-घिर आयें जब मेघ,वर्षा का जब देखो वेग,ह्रदय हो तरंगित, गाओ मल्हार,जानो इसे प्रकृतिContinue reading “सुनो उनका गीत आँखें मूँदे”
तूँ तो सन्मार्ग का पथिक ठहरा
बन उजाला जग को दिखा राह, न हो मन में तेरे कोई और चाह, उठा हर गिरे हुए को बाँह पकड़, उदासीनता की न हो तुझ पे कोई जकड़, बन मरहम हर किसी के घाव का, माँझी बन मँझधार में फँसी हर नाव का, बुझा ज्वाला बन धधकती हर आग को, तज दे हर कटुताContinue reading “तूँ तो सन्मार्ग का पथिक ठहरा”
बिकाऊ नहीं मेरा ज़मीर
मौज लो और रोज़ लो, न मिले तो खोज लो, कोई पल न आएगा दुबारा, यह जान लो और सोच लो, जिस राह पर दुश्वारियाँ बढ़ें, उधर जाते कदम रोक लो, ख़ुशियों का हो जो दिखता रेला, अपनी ओर उसे मोड़ लो, तारों की फैली इस चादर को बढ़ा हाथ तुम ओढ़ लो, बहते दरियाContinue reading “बिकाऊ नहीं मेरा ज़मीर”
As Life Unfolds Its Fascinating Story
As life unfolds its fascinating story, As I see it bathed in all its glory, As I soak in its mystique and its power, As I see it all its benedictions upon me shower, As I set my mind to its fabulous nebulousness, As its twists and turns stretch my credulousness, As I endeavour andContinue reading “As Life Unfolds Its Fascinating Story”
Adieu, Dear Brother
My loving tribute in verse to the known actor, director and performer, Satish Kaushik, who has bowed out of the stage of life The great performer is dead and gone, Embarked upon a journey to the unknown, He played his part to the hilt, He never let his spirits wilt, He entertained us with hisContinue reading “Adieu, Dear Brother”
शुरू हुई तब उस पार की होली
रंग चढ़े प्रभु नाम का, यह रंग न फीका होवे, जब यह रंग चढ़ चले, और रंग न भावे मोहे, होली खेली जब प्रभु संग, उसके रंग में जब गई रंग, नाम की जब चढ़ी खुमारी, अनन्य भक्तों में जब हुई शुमारी, जीवन का पाया सार, और बेड़ा हो गया पार, प्रभु चरणों की लीContinue reading “शुरू हुई तब उस पार की होली”
मानवता का यह कैसा रूप?
किसे फ़िक्र दुनिया कहाँ खड़ी सबको अपनी-अपनी हैं पड़ी, अपनी तूती सभी बजायें, अपनी दुकान सभी सजायें, अपना शंख नाद स्वयं ही करते, अपने गुणों का दम ख़ुद ही भरते, अपने मोहपाश में ख़ुद ही जकड़े, खड़े अहम् का दामन पकड़े, दंभ जिनके सिर चढ़ कर कर बोले, उनके ज्ञान चक्षु कोई कैसे खोले, उल्टीContinue reading “मानवता का यह कैसा रूप?”
न करो ख़ुद को ज़ाया
मैंने जब उस अजनबी को गले लगाया. पहले तो वह ठिठका, फिर मुस्कुराया, बोला,” क्या है इसमें तुम्हारा मतलब, या फिर है यह कोई तुम्हारी गफ़लत? दिल का सहरा तो इक-इक बूँद को तरसे, आज मोहब्बत की बरखा यहाँ कहाँ है बरसे, जब बंद आँखों से हर कोई अंधी दौड़ में भागे, तुम्हारी आँख खुलीContinue reading “न करो ख़ुद को ज़ाया”