My loving tribute in verse to the known actor, director and performer, Satish Kaushik, who has bowed out of the stage of life The great performer is dead and gone, Embarked upon a journey to the unknown, He played his part to the hilt, He never let his spirits wilt, He entertained us with hisContinue reading “Adieu, Dear Brother”
Author Archives: Arun Bhagat
शुरू हुई तब उस पार की होली
रंग चढ़े प्रभु नाम का, यह रंग न फीका होवे, जब यह रंग चढ़ चले, और रंग न भावे मोहे, होली खेली जब प्रभु संग, उसके रंग में जब गई रंग, नाम की जब चढ़ी खुमारी, अनन्य भक्तों में जब हुई शुमारी, जीवन का पाया सार, और बेड़ा हो गया पार, प्रभु चरणों की लीContinue reading “शुरू हुई तब उस पार की होली”
मानवता का यह कैसा रूप?
किसे फ़िक्र दुनिया कहाँ खड़ी सबको अपनी-अपनी हैं पड़ी, अपनी तूती सभी बजायें, अपनी दुकान सभी सजायें, अपना शंख नाद स्वयं ही करते, अपने गुणों का दम ख़ुद ही भरते, अपने मोहपाश में ख़ुद ही जकड़े, खड़े अहम् का दामन पकड़े, दंभ जिनके सिर चढ़ कर कर बोले, उनके ज्ञान चक्षु कोई कैसे खोले, उल्टीContinue reading “मानवता का यह कैसा रूप?”
न करो ख़ुद को ज़ाया
मैंने जब उस अजनबी को गले लगाया. पहले तो वह ठिठका, फिर मुस्कुराया, बोला,” क्या है इसमें तुम्हारा मतलब, या फिर है यह कोई तुम्हारी गफ़लत? दिल का सहरा तो इक-इक बूँद को तरसे, आज मोहब्बत की बरखा यहाँ कहाँ है बरसे, जब बंद आँखों से हर कोई अंधी दौड़ में भागे, तुम्हारी आँख खुलीContinue reading “न करो ख़ुद को ज़ाया”
ख़ुद ही ख़ुद से हैं हारे हुए
*अहसास–ए–कमतरी के मारे हुए, ख़ुद ही ख़ुद से हैं हारे हुए, उन्हें कोई क्योंकर देगा शिकस्त, जिनके हौंसले यूँही हैं पस्त, अपनी नज़रों में जो ख़ुद को आंकें कम, ओढ़ लें जो बेवजह के ग़म, जिन पे कमतरी का गहरा साया है, उन्हें कब कोई समझा पाया है, ज़रूरी है ख़ुद में मुतमईन और भराContinue reading “ख़ुद ही ख़ुद से हैं हारे हुए”
ख़ुद ही ख़ुद को न जानूँ
अपनी जद्दो-ज़हद से से होकर सुर्ख़-रू, मुद्दत बाद जब हुआ ख़ुद से रूबरू, तो अपने अंदर इक अजनबी पाया, ग़ज़ब उसके ढंग, अजब उसका साया, ख़ुद से ख़ुद की दूरी का अजब ही है क़िस्सा, कैसे इक नया ही शख़्स बन गया है मेरी रूह का हिस्सा, मुख़्तलिफ़ उसका चेहरा, निराली उसकी चाल, क्योंकर मैंContinue reading “ख़ुद ही ख़ुद को न जानूँ”
Listen When the Stars Tell Their Riveting Story
Listen when the universe to you does speak, In awe at its vastness take a peek, Listen when the stars tell their riveting story Which is simply awesome and hoary, Listen when the galaxies go singing their way, Listen to the primordial sound so profound and gay, Let the cosmic energy seep into your being,Continue reading “Listen When the Stars Tell Their Riveting Story”
फ़ौलाद है तूँ, कर फ़तह हासिल न ग़म कर, न हो उदास, है ज़िंदगी का अज़ीम तोहफ़ा तेरे पास, ख़ुदा के वास्ते न कर इसे ज़ाया, बड़ी मुश्किलों से इंसानी चोला तूने पाया, ज़िंदगी का प्याला जी भर के पी, न दम घोंट अपना, तूँ खुल के जी, ख़ुद को ख़ुदा का अक्स जान कर,Continue reading
कभी तो वो दिन आएगा
कभी तो वो दिन आएगा, जब दिल दिल की राह पाएगा, कभी तो देखेंगे वो सहर, ख़ुदा की जब बरसेगी मेहर, जब मोहब्बत न होगी रुसवा, इंसानियत का परचम लहराएगा, जब सच का होगा राज, और झूठ का होगा पर्दाफ़ाश, जब इंसाफ़ की तूती बजेगी, जब अमन की बगिया सजेगी, जब गुस्ताखी न होगी किसीContinue reading “कभी तो वो दिन आएगा”
पर फैला के मैं उड़ जाऊँ
मैं आसमानों को छूने को बेक़रार, असल तरक़्क़ी के लिए है यही दरकार, पर फैला के मैं उड़ जाऊँ, अपना मुस्तक़बिल रौशन कर पाऊँ, यही मेरी चाह, यही मेरा अरमान, और यही है ख़ुदा का फ़रमान, जहां औरत की इज़्ज़त, वहीं फ़रिश्ते बसते, उस माशरे के खुल जाते सब रस्ते, काँधे से तुम्हारे काँधा मिलाContinue reading “पर फैला के मैं उड़ जाऊँ”