कैसे होते हैं अच्छे मित्र?

कैसे होते हैं अच्छे मित्र? जैसे कोई नायाब इन्र जिसकी ख़ुशबू से फ़िज़ा महके, अंतर्मन हो गदगद रह रहके, वे करते जीवन को रौशन, अंतरात्मा का करते पोषण, ह्रदय तारों को झंकृत करते, ख़ाली झोली को वे भरते, तपती रेत पर बादल की छाया, हमारे हमजोली और हमसाया, उन्हें मानिए प्रकृति का वरदान, मिलें जोContinue reading “कैसे होते हैं अच्छे मित्र?”

प्रेम पथ विस्तार किया नहीं

बुन लिए नफ़रतों के जटिल जाल, क्या कर लिया हमने अपना हाल, भगवान को बाँट लिया कई हिस्सों में, क़ैद कर लिया उसे अपने-अपने क़िस्सों में, घृणा-द्वेष और वैमनस्य का किया ऐसा तांडव, त्रस्त हुए जिससे न जाने कितने पांडव, झुकने को मान लिया सबने बहुत सस्ता, चुन लिया लोभ, मोह, अहंकार का रस्ता, हमनेContinue reading “प्रेम पथ विस्तार किया नहीं”

ए ख़ुदा, रहम कर

ग़ुरूर के चलते सजदे में सर झुकाना भूल जाता हूँ ख़ुद को तेरी पाक मोहब्बत के काबिल बनाना भूल जाता हूँ भूल जाता हूँ तेरी रहमतों का शुकर करना भूल जाता हूँ नहीं चाहिए मुझे अपनी सलाहियतों का दम भरना भूल जाता हूँ कि मैं तो तेरे कदमों की ख़ाक हूँ वक़्त के कदमों मेंContinue reading “ए ख़ुदा, रहम कर”

कितने प्रश्न मुँह बायें खड़े हैं

कितने प्रश्न मुँह बायें खड़े हैं उत्तर की माँग पर अड़े हैं, ये सवाल वाक़ई हैं बहुत ढीठ, न मोड़ सकते तुम उनसे पीठ, सही-ग़लत न्याय-अन्याय की पूछते बात, न ये देखें दिन और न ही देखें रात, अनंत काल से ये यूँ ही अचल अडिग खड़े हैं, इनको हल करते-करते हम कितने विवादों मेंContinue reading “कितने प्रश्न मुँह बायें खड़े हैं”

इंसानियत को ग़र दिया गंवा

इंसानी क़दरों का पतन न सह सकता कोई वतन इन क़दरों को जो खो दिया मानो विनाश का बीज बो दिया भूल गए सही ग़लत का फ़रक तो समझो हो गए हम गरक बर्बादियों के रस्ते खुल जाएँगे फिर कहाँ चैन हम पाएँगे इंसानियत को ग़र दिया गंवा सारी तरक़्क़ी हो जाएगी हवा जब ग़ैरतContinue reading “इंसानियत को ग़र दिया गंवा”

कैसी ये वहशत है

कैसी ये वहशत है फ़िज़ाओं में भी दहशत है दहकते अँगारे हैं आज ज़ुबानों पर लगा पाया कौन पहरे बदगुमानों पर उल्फ़त पर भी लग गए पहरे न जाने ये दौर जा कहाँ ठहरे दुआओं में भी जब नहीं रहा असर इस माशरे में अब कैसे हो बसर दरकते पहाड़ भी कुछ बोल रहे हमारीContinue reading “कैसी ये वहशत है”

चाँद पर पहुँचा चंद्रयान

चाँद पर पहुँचा चंद्रयान , क्यों न हो हमें अभिमान, चाँद पर तिरंगा लहराये, क्यों न हर्ष से मन भर आए, क्यों न अपने वैज्ञानिकों पर करें अभिमान, राष्ट गौरव का वो बने हैं यान, साइंसदान महिलाओं ने हैं दिखाए जौहर, महिला शक्ति पर लगा दी अपनी मोहर, देश ने एक नया आयाम पार कियाContinue reading “चाँद पर पहुँचा चंद्रयान”

Design a site like this with WordPress.com
Get started