ख़ाली हाथ आए, ख़ाली हाथ जाना, भाग मृगतृष्णाओं के पीछे कुछ नहीं है पाना, अटल सत्य से हम सब दूर भागते, रहते सोए, कभी न जागते, भ्रम में जीते, भ्रम में मरते, आलिंगन सत्य का कभी न करते, यूहीं दौड़ती विकारों की गाड़ी, यूहीं उलझाती अज्ञानता की बाढ़ी, यूहीं मद सिर चढ़ कर बोलता, पटContinue reading “क्यों?”
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मुझे गिला है उनसे
मुझे गिला है उनसे जो सच को सच नहीं कहते जो झूठ की मार को चुप-चाप अनचाहे सहते झूठ को जाने-अनजाने वो देते बल नहीं समझते कि कड़वा होगा उसका फल नहीं सोचते वो कि झूठ का यूँ फैलेगा जाल तो क्या होगी हमारी गति, हमारा हाल समय की यह माँग है कि सच केContinue reading “मुझे गिला है उनसे”
आज से हर लम्हे को मनाते हैं
नये साल में नई सोच आज से हर लम्हे को मनाते हैं उसे अपने ख़्वाबों से सजाते हैं सुरमई शाम से कुछ रंग चुराते हैं उनसे अपनी क़िस्मत को लुभाते हैं हर लम्हे को संवारना है हमारा फ़र्ज़ यह है ज़िंदगी का हम पर क़र्ज़ आओ इस क़र्ज़ को चुकातें हैं उम्मीदों की शमा हरContinue reading “आज से हर लम्हे को मनाते हैं”
नव वर्ष के लिए मंगल कामनाएँ! नव वर्ष आप सब के लिए शुभ, अर्थपूर्ण एवं आनन्दमय हो! पल्लवित हों नई संवेदनाएँ नया साल आएगा ढेरों ख़ुशियाँ लाएगा अंगड़ाई लेंगीं नयी उमंगें उठेंगी मन में नयी तरंगें अंतर्मन में बजेंगे ढोल-मंजीरे खुल जाएँगी सब ज़ंजीरें देखो वो अंधेरा गया उग रहा है एक सूरज नया ख़ुशीContinue reading
माँ तो आख़िर माँ होती है
माँ की पुण्यतिथि पर उनकी पुण्य स्मृति को समर्पित माँ तो आख़िर माँ होती है! बच्चों में संस्कारों के बीज बोती है ईसा समान है सूली पर चढ़ जाती इसी में है परम् आनंद वह पाती कौन भूल सका है उसका प्यार-दुलार उसके मन की वात्सल्यमयी पुकार उसके सुकोमल मातृत्व की छाया जैसे एक विशालContinue reading “माँ तो आख़िर माँ होती है”
जब कहानी ही बनना है इक दिन आख़िर हम सब हैं महज़ कहानियाँफ़ख़्त वक़्त की रगों की रवानियाँजब कहानी ही बनना है इक दिनऔर कोई चारा ही नहीं उस बिनतो कहानी फिर होनी चाहिए ऐसी खूबसूरतजैसे संग-ए-मरमर की दिलकश कोई मूरतकोई सुनाए तो खूबसूरत हो अफ़सानाबरसों तक जिसे याद रखे ये ज़मानाऐसी कहानी बनने कोContinue reading
सकूँ का कोई रस्ता ज़रूर निकलेगा
मिरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा इसी स्याह समुंदर से नूर निकलेगा -अमीर कज़लबाश अमीर कज़लबाश के इस उमदा कलाम से उपजी मेरी रचना काले मायूस बादल का चीर सीना मेरे हौंसलों का सूरज ज़रूर निकलेगा चाहे लाख कोशिश कर ले ज़हालत ज़ेहानत का कोई रस्ता ज़रूर निकलेगा बीच बैचेन रूहों की इस कश्मकश केContinue reading “सकूँ का कोई रस्ता ज़रूर निकलेगा”
चलो बनाएँ इक नई दुनिया
चलो बनाएँ इक नई दुनिया जिसमें गाती हो इक मुनिया, मोहब्बतों के बजते हों ढोल-मंजीरे, टूट चुकी हों सब ज़ंजीरें, नफ़रतों के न बाज़ार गरम हों, दिलों के अंदर एहसास नरम हों, बजती हो बंसी अमन-चैन की, रौशन सहर हर स्याह रैन की, किरदार उमदा हो , इरादे नेक, रश्क कर उठे ये मुआशरा देख,Continue reading “चलो बनाएँ इक नई दुनिया”
As Life Slips Through Our Fingers
As life slips through our fingers And puts us through its various wringers, We wonder which way will it wend And where, Oh where!, will it all end. But then the end is not ours for the asking, The secret lies curled up with the gods in heaven basking, It hangs tantalisingly somewhere up inContinue reading “As Life Slips Through Our Fingers”
उस पुण्य धरा को करें नमन
शूल जहां चुभता नहीं दीपक जहां बुझता नहीं इरादे अटल पर्वत समान गतिशीलता को नहीं विराम गंगा का जहां सतत् प्रवाह चैतन्य का है व्योम गवाह हिमालय जहां गगन को चूमे राम नाम पर जन-जन झूमे जप- तप संयम जहां की रीत घृणा-द्वेष पर भारी प्रीत समस्त विश्व को कुटुंब जो माने पवित्र-पावन कण-कण कोContinue reading “उस पुण्य धरा को करें नमन”