कैसे होते हैं अच्छे मित्र?

कैसे होते हैं अच्छे मित्र?

जैसे कोई नायाब इन्र

जिसकी ख़ुशबू से फ़िज़ा महके,

अंतर्मन हो गदगद रह रहके,

वे करते जीवन को रौशन,

अंतरात्मा का करते पोषण,

ह्रदय तारों को झंकृत करते,

ख़ाली झोली को वे भरते,

तपती रेत पर बादल की छाया,

हमारे हमजोली और हमसाया,

उन्हें मानिए प्रकृति का वरदान,

मिलें जो करिए मोती दान,

झंझावात में वे थामें हाथ,

क्यों डरिये जब वे हों साथ?

निर्मम जगत में हमरा मर्म वे जानें,

क्यों न उन्हें एक अमूल्य निधि मानें?

अरुण भगत

सर्वाधिकार सुरक्षित

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

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