इस दिवाली कर जीवन अपना प्रकाशित,
स्वयं की गरिमा बढ़ा, सत्य को कर स्थापित,
आत्मा को बना प्रहरी, असत्य को कर निष्कासित,
छल कपट का साथ दे न कर स्वयं को श्रापित,
धर्म की उठा पताका, स्वयं को बना सबल,
इच्छा सर्वोत्तम जीवन जीने की हो जाए
तेरी प्रबल,
कर धारण ज्ञान को, अज्ञानता को कर खंडित,
न्याय का बन रखवाला, अन्याय को कर दंडित!
अधर्म को कर पराजित घर लौटे श्री राम,
उन्हें बनाएँ आदर्श तो मंगल होवें सब काम,
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम से सीखे मर्यादाओं में रहना,
उत्तम जीवन मूल्यों को बनाएँ अपना गहना,
दीपावली के शुभ अवसर पर उजला हो हम सब का अंतर्मन,
धर्म का प्रसार हो, धन्य हों जन- जन!
धन्य हों जन-जन, जन मानस हों उदीयमान,
हम सब की हृदय भूमि में हों प्रभु राम विद्यमान!
अरुण भगत
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