रिश्ता वही जो दे रूह को सकूँ

रिश्ते कहने से नहीं बनते,

वे बनते हैं उन्हें जीने से,

कहने से ही अगर रिश्ते बन जाते प्रगाढ़,

तो फिर तो उम्दा रिश्तों की आ जाती बाढ़!

आज अगर रिश्ते रह गये हैं सिर्फ़ नाम के,

तो हैं वे फिर किस काम के?

हैं भी और नहीं भी,

इसी ऊहापोह में ज़िंदगी हो जाती है बसर,

और ऐसे रिश्तों का रह न जाता है कोई असर!वह रिश्ता भी क्या रिश्ता जो फ़ायदा देख निभाया जाए,

ऐसे रिश्तों से भला क्या पाया जाए ?

रिश्ता वह है जिससे बंधी हो मन की डोर,

जो न डगमगाए चाहे आ जाएँ आंधियाँ घोर,

रिश्ता वह है जो दे एक दूसरे की रूह को सकूँ,

जिसमें एक दूजे के लिए कुछ कर मिटने का हो जनूँ,

रिश्ता वही जिस से मन गुल की तरह खिल जाए,

जैसे किसी को खोई हुई कोई जन्नत मिल जाए!

अच्छे रिश्ते ही फूंक सकते हैं रूह में जान,

उन्हीं पर हम कर सकते हैं नाज़ और मान!

कारगर रिश्तों को सीने से लगाए रखिए,

उन्हें हम-निवाला और हम-प्याला बनाए रखिए,

वही करेंगे हमारे अंतर्मन का भरण पोषण,

वही करेंगे हमारे जिंदगियों को रौशन,

वही चमकेंगे आसमाँ में बन कर सितारे,

वही होंगे हमारी आन बान और शान जो होंगे हमें जान से भी प्यारे!

अरुण भगत

Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

19 thoughts on “रिश्ता वही जो दे रूह को सकूँ”

    1. बहुत बहुत धन्यवाद, अर्चित! ये पेशकश अदभुत है या नहीं पर जीवन बहुत अदभुत है!

      Like

  1. वाह!क्या बात है सर!
    रिश्ता वह जिससे बंधी हो मन की डोर।
    🙏🙏🙏👌👌👌

    Like

    1. धन्यवाद, ममता जी! जिस रिश्ते से मन की डोर न बंधी हो, वह तो केवल मात्र औपचारिकता ही है! रिश्ते तो मन और आत्मा के ही हैं जो सार्थक हैं!

      Like

    1. बहुत बहुत धन्यवाद, स्नेहलता मैडम! एक अच्छा जीवन बहुत हद तक अच्छे रिश्तों पर ही आधारित है, इसलिए रिश्तों का महत्व हमेशा रहेगा।

      Like

    1. धन्यवाद, प्रियंका जी! खुश रहिए! आप का जीवन अच्छे रिश्तों से परिपूर्ण रहे!

      Like

Leave a Reply

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free