रिश्ते कहने से नहीं बनते,
वे बनते हैं उन्हें जीने से,
कहने से ही अगर रिश्ते बन जाते प्रगाढ़,
तो फिर तो उम्दा रिश्तों की आ जाती बाढ़!
आज अगर रिश्ते रह गये हैं सिर्फ़ नाम के,
तो हैं वे फिर किस काम के?
हैं भी और नहीं भी,
इसी ऊहापोह में ज़िंदगी हो जाती है बसर,
और ऐसे रिश्तों का रह न जाता है कोई असर!वह रिश्ता भी क्या रिश्ता जो फ़ायदा देख निभाया जाए,
ऐसे रिश्तों से भला क्या पाया जाए ?
रिश्ता वह है जिससे बंधी हो मन की डोर,
जो न डगमगाए चाहे आ जाएँ आंधियाँ घोर,
रिश्ता वह है जो दे एक दूसरे की रूह को सकूँ,
जिसमें एक दूजे के लिए कुछ कर मिटने का हो जनूँ,
रिश्ता वही जिस से मन गुल की तरह खिल जाए,
जैसे किसी को खोई हुई कोई जन्नत मिल जाए!
अच्छे रिश्ते ही फूंक सकते हैं रूह में जान,
उन्हीं पर हम कर सकते हैं नाज़ और मान!
कारगर रिश्तों को सीने से लगाए रखिए,
उन्हें हम-निवाला और हम-प्याला बनाए रखिए,
वही करेंगे हमारे अंतर्मन का भरण पोषण,
वही करेंगे हमारे जिंदगियों को रौशन,
वही चमकेंगे आसमाँ में बन कर सितारे,
वही होंगे हमारी आन बान और शान जो होंगे हमें जान से भी प्यारे!
अरुण भगत
शानदार कविता सर
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धन्यवाद, छविल! खुश रहिए!
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True lines sir🌸🌸🌸
Well said sir❤!!!
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Thank you, Sapna dear! If a message is well-received, that is also God’s grace!
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Adbhut peshkash
Ache rishte hi zindagi ko acha bnaate hain…
Behatreen 👌👌 kavita!!!
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बहुत बहुत धन्यवाद, अर्चित! ये पेशकश अदभुत है या नहीं पर जीवन बहुत अदभुत है!
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Very nice💞
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Thank you, Sahil dear! Happy that you found the poem nice! God bless you!
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Beautiful poetry! Sir.
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Thank you very much, Vijay Laxmi dear! We should all try to keep on adding to the beauty of life. Stay blessed.
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Thanks a lot, Sahil dear! If one can one way or the other add a bit to the beauty of life, so much the better, isn’t it?
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वाह!क्या बात है सर!
रिश्ता वह जिससे बंधी हो मन की डोर।
🙏🙏🙏👌👌👌
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धन्यवाद, ममता जी! जिस रिश्ते से मन की डोर न बंधी हो, वह तो केवल मात्र औपचारिकता ही है! रिश्ते तो मन और आत्मा के ही हैं जो सार्थक हैं!
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Bahut hi sundar Kavita, Sir.
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बहुत बहुत धन्यवाद, स्नेहलता मैडम! एक अच्छा जीवन बहुत हद तक अच्छे रिश्तों पर ही आधारित है, इसलिए रिश्तों का महत्व हमेशा रहेगा।
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Very nice Sir
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धन्यवाद, प्रियंका जी! खुश रहिए! आप का जीवन अच्छे रिश्तों से परिपूर्ण रहे!
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True…
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Thanks for endorsing the theme of the poem, Saurabh! God bless you!
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