ज़िंदगी की राहों पे तूँ चला चल

ज़िंदगी की राहों पे तूँ चला चल ज़िंदगी की राहों पे तूँ चला चल, बेबस हो कर तूँ हाथ न मल! ज़िंदगी है चलने का नाम, इसमें रुकने का क्या काम? बढ़ आगे और जीत का परचम फहरा, झूम तूँ और मस्ती में लहरा! जीत तूँ ख़ुद से और खुदी को कर बुलंद, जान लेContinue reading “ज़िंदगी की राहों पे तूँ चला चल”

गुरु बिन कैसे हो गति?

गुरु बिन कौन दे ज्ञान, गुरु बिन कैसे हो सत्य की पहचान, गुरु बिन कौन जो पार लगाए, और सच का है अर्थ सिखलाए, गुरु बिन कैसे हो गति, गुरु बिन कौन दे सके है सन्मति? गुरु बिन नाहीं कोई ठौर, गुरु हैं जीवन पतंग की डोर! गुरु देत संस्कार की निधि, गुरु बतलाते जीवनContinue reading “गुरु बिन कैसे हो गति?”

Why the Runaway Tiger of Dissatisfaction Mount?

Why over what you don’t have fuss? Why prove ungrateful thus? Why don’t you your blessings count? Why the runaway tiger of dissatisfaction mount? A sense of inadequacy will you nowhere lead, It will just the demons of ingatitude feed! Be aware of the abundance around, And with vibes of peace and fulfilment yourself surround!Continue reading “Why the Runaway Tiger of Dissatisfaction Mount?”

प्रकाश पुंज बन

जीवन की चुनौतियों का कर सामना डट कर, व्यवहार क्यों न हो तेरा कुछ हट कर! बाधाओं को वीरता से पार कर, उन से डर डर के यूँ बेवजह न मर! बढ़ा चल निरंतर नए क्षितिजों की ओर, देख, प्रतीक्षा करती तेरी नित्य एक नयी भोर! जीवन के उन्माद में तूँ लिप्त न हो, बनContinue reading “प्रकाश पुंज बन”

अमृत हैं बारिश की बूँदें

अमृत हैं बारिश की बूँदें, मज़ा लो इनका आँखें मूँदे! वर्षा की शीतल फुहार, जैसे माँ का दुलार! रिमझिम बरसता सावन लगे कितना मनभावन! तपती धरती को करता तृप्त, जैसे उसके प्रेम में हो वह लिप्त! मौज में मेढक टर्राते, सब हैं झूमते और हैं गाते ! जल से यूँ भर जाते नदियाँ झरने, जैसेContinue reading “अमृत हैं बारिश की बूँदें”

If You Can Look Yourself Squarely In The Eye—

If you can look yourself squarely in the eye, In peace you will live and in peace die! If on your conscience you have no weight, As a good person you can yourself rate! If of your actions you are proud, Rest assured you will stand out in a crowd! Dignity is the biggest blessingContinue reading “If You Can Look Yourself Squarely In The Eye—”

यह कौन है जो शून्य में तकती ?

यह कौन है जो मौन खड़ी, मुसीबतों से घिरी, मुश्किल में पड़ी! यह कौन है जो शून्य में तकती, ऐसा लगे जैसे कुछ कर नहीं सकती! यह कौन है जिसे कोई कुछ न जाने, और जिसका अस्तित्व कोई नहीं है माने! यह कौन है जिसकी सिसकियाँ अंदर ही घुटतीं, और जिसकी ख्वाहिशें रोज़ हैं लुटतीं,Continue reading “यह कौन है जो शून्य में तकती ?”

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