The Stupid of Themselves are So Sure

The stupid of themselves are so sure, They think that none more than them is pure! They live with their certainties false, To all the wrong tunes they so gleefully dance! They frolick in the garden of their folly, They are so terribly smug, by golly! They live in their world of make believe, AndContinue reading “The Stupid of Themselves are So Sure”

अगर ग़रूर न करते

अगर ग़रूर न करते तो बेमौत न मरते, न होती हमारे ज़मीर की ज़मीं बंजर, न होता बेनूर और बेरौनक़ यह मंज़र! न फ़िज़ा में घुलता यह जानलेवा ज़हर, न बरपाते इक दूजे पे यूँ क़हर, न बनते इक दूजे की बर्बादी की वजह, न देते लम्हों में सदियों की सी सज़ा! ग़र ग़रूर औरContinue reading “अगर ग़रूर न करते”

कितना अच्छा होता

कितना अच्छा होता कि पैसा चाहे थोड़ा कम होता लेकिन ज़िंदगी में होता जोश, चीज़ों को लेकर न हो जाते बदहोश! कितना अच्छा होता कि ऐशोआराम थोड़ा कम होता पर हर किसी का ज़मीर न दिखाई देता सोता, मन में न रह रह कर उठती हूक, प्यार की न दिखती चारों ओर भूख! कितना अच्छाContinue reading “कितना अच्छा होता”

जीवन की हर गिरह जो खोली

जीवन की हर गिरह जो खोली तो वह मुस्कुरा के बोली, जितना गहरा भी तूँ जाएगा, जीवन की थाह न पाएगा! जीवन है अथाह सागर, न समेट पाए इसे कोई गागर! यह है अनंत और विशाल, इसे ले खड़े हैं कई सवाल! हर जवाब में हैं कई और सवाल, ऐसा ही है जीवन, मन मेंContinue reading “जीवन की हर गिरह जो खोली”

Let A Million Friendships Thrive and Bloom

Friendship is a relation to cherish,It will keep you afloat and will not let you perish!It won’t be a hyperbole to sayThat it is the beacon light that shows you the way!By keeping up of love and affection the constant flow,It keeps your inner being aglow!Striking a good friendship is such a laudable goalThat theContinue reading “Let A Million Friendships Thrive and Bloom”

मौन

मौन में है छुपा बहुत कुछ, क्या, यह पूछ के तूँ बन न तुच्छ! मौन से उपजा यह संसार, मौन में है प्रभु की कृपा अपार! मौन बहुत कुछ बोलता, अनेक गाँठें है खोलता! मौन सत्य से जोड़ता, बहुत से भ्रम है तोड़ता! मौन से मिलता परम ज्ञान, मौन से ही होता है ध्यान! मौनContinue reading “मौन”

सत्य ही है जीतता जब असत्य से होता समर

सच की राह पे चल और जी तूँ शान से, फिर कौन है जो खेल पाए तेरी आन से? सच को ही जी और झूठ का विष न पी, झूठ के विषपान ने बहुतेरों की है जान ली! अपने प्रभु से, अपने इष्ट से इतना बल तूँ माँग कि असत्य के कुचक्र को तूँ सकेContinue reading “सत्य ही है जीतता जब असत्य से होता समर”

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