ज़िंदगी की राहों पे तूँ चला चल

ज़िंदगी की राहों पे तूँ चला चल

ज़िंदगी की राहों पे तूँ चला चल,

बेबस हो कर तूँ हाथ न मल!

ज़िंदगी है चलने का नाम,

इसमें रुकने का क्या काम?

बढ़ आगे और जीत का परचम फहरा,

झूम तूँ और मस्ती में लहरा!

जीत तूँ ख़ुद से और खुदी को कर बुलंद,

जान ले तूँ की खुदा को भी यही है पसंद!

घुट घुट के न जी ,

बुलंद हौंसलों का जाम तूँ पी!

बेख़ौफ़ हो जी, हर ख़ौफ़ से लड़,

मरने से पहले यूँ सौ बार न मर!

ज़िंदगी है इक नेमत, इसे यूँ न गवाँ,

कौन जाने कब यह हो जाए हवा?

इक बेशक़ीमती मौक़ा है यह,

इसका तूँ एहतराम कर,

कर ख़ुद और खुदा की बंदगी,

सकूँ से जीना चाहता है गर!

अरुण भगत

#arunbhagatwrites#poeticoutpourings#outpouringsofmyheart

#writer#poetry#

englishpoetry#indianwriter#poetryofthesoul

#hindipoetry

Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

8 thoughts on “ज़िंदगी की राहों पे तूँ चला चल

Leave a comment

Why are you reporting this comment?

Report type
Design a site like this with WordPress.com
Get started