उमड़ते बादल, बहता पानी, किसने इनकी महिमा जानी। बादल झूम-झूम कर बरसे, जब धरती पानी को तरसे, खेतों में फसलें लहलहायें, पशु पक्षी सब फिर जी जाएँ, धरा पे दौड़ जाए ख़ुशी की लहर, जैसे जी उठी हो ज़िंदगी जो गयी थी ठहर, पक्षी करें कलरव, नाचें मोर, हृदय हों पुलकित भाव-विभोर, मेघ जब हैंContinue reading “उमड़ते बादल, बहता पानी”
Author Archives: Arun Bhagat
तभी बनेगा जीवन-योद्धा
चल चला चल, चल चला चल, रुक न तू एक पल। समय की धारा की भाँति बहता जा, सब कुछ सुनता और सहता जा, कुछ नयी सीख ले हर पल से, प्रेम से सब को जीत, तू गा ख़ुशी के गीत, क्या जीता जो जीता बल से। आशाओं की ओढ़नी ओढ़, हर बेड़ी को तोड़,Continue reading “तभी बनेगा जीवन-योद्धा”
न जाने कहाँ थमेगी…
कहाँ गया वो सब अमन चैन, जब दिन थे ख़ुशनुमा और सकूँ भरी थी रैन, जब बादल बरसते थे दिल खोल कर, जब हर बात न करनी पड़ती थी तोल कर, जब मोर की तरह पंख खोले था दिल नाचता, जब दिल का दिल से था क़ायम पूरा राब्ता, तब मानो पंख लगाकर उड़ जातेContinue reading “न जाने कहाँ थमेगी…”
ज़िंदगी की अधूरी कहानी
प्रतिदिन सपने लेते आकार, उनमें से कुछ ही होते साकार, बहुत से समय की गर्त में जाते खो जैसे बुझ जाए जलती हुई कोई लौ, पर होते हैं कुछ ऐसे अपूर्ण सपने जो लगें हमें बहुत अपने, वे रह जाते बन कर एक टीस मन में जैसे चुभता हो कोई शूल तन में, ज़िंदगी मेंContinue reading “ज़िंदगी की अधूरी कहानी”
कहाँ लुप्त हो गए…
कहाँ लुप्त हुए वो अमन चैन के दिन, जब जीवन की न कर सकते थे परिकल्पना प्रेम बिन, जब जीवन लगता था सारगर्भित, जब सनेह के पुष्प होते थे पल्लवित, जब मन में उठती थी उल्लास की तरंग मानो आकाश में झूमती नाचती मस्त कोई पतंग, सादा जीवन, प्रगाढ़ सम्बंध, सुंदर गीत, बिना जीत केContinue reading “कहाँ लुप्त हो गए…”
सब कुछ ख़ुदा पे छोड़ दे
मन में यह मलाल क्यों, चेहरे पे ये सवाल क्यों, कहाँ मिलेंगे तुझे जवाब, होता है हलकान क्यों? जान ले तू यह आज, यहाँ राज़ में हैं दफ़न राज़, कहाँ परतों को तू हटाएगा, इसी तिलस्मी जाल में उलझ जाएगा, न खड़े कर इतने सवाल, न बन जा खुद ही अपने जी का जंजाल, डालContinue reading “सब कुछ ख़ुदा पे छोड़ दे”
स्वयं को करो सिद्ध
चलो उठो, हाथ बढ़ा कर छू लो, यह विस्तृत गगन तुम्हारा है, इसी सोच ने बहुतेरों का जीवन संवारा है, चलो, हो जाओ लहरों पर सवार, दिखता है दूर जो क्षितिज, वह भी तो तुम्हारा है, आगे बढ़ने वालों को रुकना कहाँ गवारा है? चंद्रमा के घोड़े पे सवार बढ़ जाओ तारों की ओर, कौनContinue reading “स्वयं को करो सिद्ध”
In Your Heart Lies Your Salvation
Listen to what your heart says, Candidly luminous are its ways, It is where your God resides, Over it all of your goodness presides, Does it somewhere a bell ring That of your life your heart is the well-spring? Your mind can lead you astray But your heart will always show you the right way,Continue reading “In Your Heart Lies Your Salvation”
This Culture of High Rises But Low Life
Today’s soulless culture Nibbles at your soul like a vulture, It saps your energy Because its mindlessness with your inner being has no synergy, With lust as its creed, It promotes unabashed greed, Armed with its project of dumbing down your mind, It is certainly one of its kind, Your sense you have to pawnContinue reading “This Culture of High Rises But Low Life”
अजीब सी यह एक पहेली है
ज़िंदगी की क्या ग़ज़ब कहानी है, कभी सब कुछ जाता थम, कभी लगे रगों में रवानी है, अजीब सी यह एक पहेली है, कभी दुश्मन, कभी लगे सहेली है, कभी बैठाए सिर पर, कभी नीचे पटकती है, कभी सजे काजल की तरह आँखों में, कभी कंकड़ की तरह अटकती है, कभी लहलहाते खेतों की तरह,Continue reading “अजीब सी यह एक पहेली है”