सीखें खुद ही के साथ जीना

अपना दर्द खुद से बाँटें, खुद ही चुनें राह के काँटे, खुद ही सिएँ अपना चाक सीना, सीखें खुद ही के साथ जीना, खुद ही ज़ख्मों पे मरहम लगाएँ, खुद ही बलाओं को दूर भगाएँ, खुद ही करें खुद का मुआयना, खुद ही दिखाएँ खुद को आईना, कौन आएगा तुम्हारा हाथ थामने, कौन आएगा तुम्हाराContinue reading “सीखें खुद ही के साथ जीना”

हर इक पर बरसती उस रब की रहमत

ज़र्रे-ज़र्रे में मेरे राब की निगाहे करम है, कौन कहता है, उस पे ज़्यादा और मुझ पे कम है, चप्पे-चप्पे पे दिखता है उसका नूरी जलाल, फिर क्यों हो उसको ले मन में कोई शुबहा या मलाल, हर इक पर बरसती उस रब की रहमत, क्यों न इसको समझने की करते हम ज़हमत, क्यों नContinue reading “हर इक पर बरसती उस रब की रहमत”

किसी का आस-पास होना ही बहुत है

किसी का आस–पास होना ही बहुत है, चाहे न बतियाएँ, अपनी-अपनी व्यस्तताओं में रह जाएँ, चाहे हो जाएँ खिन्न, और एक दूसरे पर गर्माएँ, चाहे इम्तिहान लेते-लेते एक दूसरे का उकता ही जाएँ, पर किसी का पास होना ही बहुत है, यह तब पता लगता है जब वह जाए कहीं दूर, जब ख़ालीपन खड़ा होContinue reading “किसी का आस-पास होना ही बहुत है”

सत्य तो रहता सदा अजय

सत्य की होती असत्य पर विजय, क्योंकि सत्य तो रहता सदा अजय, सत्य न होता खंडित, न अविभाजित, न होता वह कभी पस्त, न पराजित, सत्य का तेज, सत्य की गरिमा, बाँच न सके कोई उसकी महिमा, सत्य तो है अविचल लोह- स्तम्भ, पराजय का मुँह देखें असत्य और दम्भ, जग जननी है सदा सत्यContinue reading “सत्य तो रहता सदा अजय”

पल में बसती सारी सृष्टि

बीती बात बिसारिए, अपना आज संवारिए, बीत गया जो कल, कभी न लौटेगा वह पल, जो समय के गर्त में खो गया, अतीत का भाग वह हो गया, उसको लेकर न समय गँवाइए, इस पल में सार्थकता पाइए, जीवन इस पल में सिमटा, सम्पूर्ण अर्थ इस में है लिपटा, इस में है जीवन का सार,Continue reading “पल में बसती सारी सृष्टि”

रुकने का यहाँ क्या काम?

मुश्किल है अलविदा कहना, मुश्किल है जुदाई का दुःख सहना, पर ज़िंदगी तो है चलने का नाम, रुकने का यहाँ क्या काम? चाहे हमें एक दूसरे पर कितना भी प्यार क्यों न हो आता, वक़्त का बहाव हम सब को है बहा ले जाता, ले जाता हमें नयीं मंज़िलों की ओर, करिए इस बात परContinue reading “रुकने का यहाँ क्या काम?”

बेटियाँ माँ-बाप की जान हैं होती

बेटियाँ माँ-बाप की जान हैं होती, उनके दिल की ज़ुबान हैं होती, उनके दम से होता रौशन गुलज़ार, उनकी ख़ुशबू से महके संसार, मीठे प्यारे उनके बोल, कोई आंक सके न उनका मोल, अपना धीरज वो कभी न खोतीं, घर कुनबे की शान वो होतीं, कुदरत का नायाब तोहफ़ा उन्हें मानो, उस रब की ख़ासContinue reading “बेटियाँ माँ-बाप की जान हैं होती”

हवाओं से पूछा मैंने

हवाओं से पूछा मैंने, कहाँ तुम रहतीं हमेशा उड़ती, न पीछे देखतीं, न मुड़तीं, अपने घोड़ों पे सवार, आनंद मनातीं अपार, नए शहरों को चूमतीं, नए गावों में घूमतीं, पहाड़ों के ऊपर इतरातीं, सागर पर बल खातीं, मरुस्थलों से जूझतीं जबकि दुनिया तुम्हें पूजती, न तुम्हारा कोई ठौर, न ठिकाना आज यहाँ, तो कल कहींContinue reading “हवाओं से पूछा मैंने”

ग़म न कर, अभी बहुत कुछ करना है

ग़म न कर, अभी बहुत कुछ करना है, हर दुश्वारी से जूझना है, हालातों से लड़ना है, इस जद्दोजहद में ही तो है ज़िंदगी का मज़ा, लहरायेगा तेरा परचम ग़र होगी रब की रज़ा, न हिम्मत तूँ हार और ग़म न कर, न घुट-घुट के बार-बार तूँ मर, जाँबाज़ बन, शिद्दत से तूँ जी, रुसवाईContinue reading “ग़म न कर, अभी बहुत कुछ करना है”

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