इंतज़ार है—

इंतज़ार है उस दिलकश सुबह का 

जब फरेब के ढेर  से सच निकलेगा 

निकलेगा भी और निखरेगा भी 

चमकेगा बुलंद सितारा बन कर। 

कटहरे में खड़ा हर बे-ईमान होगा 

रहनुमाओं का कोई ईमान होगा 

ज़ुबान की कोई क़ीमत होगी 

धूप सी उजली सीरत होगी। 

साफ़गोई की आग दहकेगी 

तभी तो ये बगिया महकेगी। 

दिल-ओ-दिमाग़ जब रोशन होंगे 

तभी तो छू पाएंगे हर बुलंदी को 

अपनी तहज़ीब पे हमें गुमान होगा 

सरज़मीं का दुनिया में नाम होगा । 

अरुण भगत

सर्वाधिकार सुरक्षित

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साफ़गोई= सपष्टता, straightforwardness

तहज़ीब= सभ्यता, संस्कृति 

गुमान = घमंड, गर्व 

सरज़मीं= देश, मुल्क

Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

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