हर इक पर बरसती उस रब की रहमत

ज़र्रे-ज़र्रे में मेरे राब की निगाहे करम है,

कौन कहता है, उस पे ज़्यादा और मुझ पे कम है,

चप्पे-चप्पे पे दिखता है उसका नूरी जलाल,

फिर क्यों हो उसको ले मन में कोई शुबहा या मलाल,

हर इक पर बरसती उस रब की रहमत,

क्यों न इसको समझने की करते हम ज़हमत,

क्यों न करते उसकी रहमतों का शुक्र,

क्यों बनाते अपनी ज़िंदगी को मैदान-ए-कुफ़्र,

क्यों उसकी चौखट पे सजदे हम न करते,

क्यों उसके नायाब तोहफ़ों का दम हम न भरते,

क्यों नापाक ख़्वाहिशों की आग में हम हैं जलते,

क्यों उसकी दिखाई नेक राह पे हम न चलते,

क्यों अपनी दग़ाबाज़ियों से मुश्किल बनाते अपने रास्ते,

क्यों नहीं पाक रखते अपना दामन ख़ुदा के वास्ते!

अरुण भगत

#arunbhagatwrites#poetry# poeticoutpourings#outpouringsof myheart#writer#Indianwriter#englishpoetry#hindipoetry#poetryofthesoul

Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

12 thoughts on “हर इक पर बरसती उस रब की रहमत

    1. धन्यवाद, चीनू जी! कमाल मेरा नहीं, लिखाने वाले का है! सब ख़ुदा की रहमत है!

      Like

  1. अति सुंदर! हम सब पर ईश्वर की दया दृष्टि तथा उपकार इतने हैं की उनका बयां करना भी व्यर्थ है। इसलिए हमें हर समय केवल ईश्वर का आभार प्रकट करना चाहिए। इससे हमारा पुर्ण जीवन सकरात्मक हो जायेगा।

    Like

Leave a reply to jogeshmidha Cancel reply

Design a site like this with WordPress.com
Get started