तभी बनेगा जीवन-योद्धा

चल चला चल, चल चला चल,

रुक न तू एक पल।

समय की धारा की भाँति बहता जा,

सब कुछ सुनता और सहता जा,

कुछ नयी सीख ले हर पल से,

प्रेम से सब को जीत,

तू गा ख़ुशी के गीत,

क्या जीता जो जीता बल से।

आशाओं की ओढ़नी ओढ़,

हर बेड़ी को तोड़,

तू उन्मुक्त पवन सा बह जा,

जो मन के उद्गार सो कह जा।

कल की कौन है जाने,

वक़्त बुने क्या ताने-बाने,

इस पल में है जीवन का सार,

जोड़ ले इससे मन की तार।

उल्लास से जी, न कभी स्वयं से हार,

तेरी उज्जवल सोच ही तेरा करेगी बेड़ा पार,

देख, नए क्षितिज जोहते तेरी बाट,

तुम्हें बुलाता समय सरिता का मोहक घाट,

दृढ़ निश्चय कर बढ़ जा आगे,

जोड़ जो टूट गए हैं धागे,

जीवन अमृत का कर ले तू रस-पान,

तभी बनेगा जीवन-योद्धा, कहलाएगा गुणों की खान!

अरुण भगत

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

10 thoughts on “तभी बनेगा जीवन-योद्धा

  1. उल्लास से जी,न कभी स्वयं से हार।
    बहुत सुंदर।🙏🙏🙏💐💐💐

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