फ़िज़ा में घुला ज़हर

फ़िज़ा में घुला ज़हर, कुदरत ने बरसाया क़हर, साँस-साँस को हुए मोहताज, जो खुद को समझें सरताज, धुएँ और गर्द के जिन्न खड़े मुँह बायें, कुछ समझ न आए हम कहाँ जाएँ, यह हमारा ही तो किया-कराया है, कुदरत को हमने समझा पराया है, खुद को हमने जाना आला, खुद ही तो बुना अपनी बर्बादीContinue reading “फ़िज़ा में घुला ज़हर”

शब्दों ने मचा रखा बवाल

शब्दों की होती गहरी चाल, शब्दों का अपना छद्म जाल, शब्दों का अपना सम्मोहन, शब्द हमारा करते दोहन, शब्द हमें हैं भरमाते, कपटी शब्दों का है खाते, शब्द मति को करते भ्रष्ट, शब्द कर सकते हमें त्रस्त, जहां शब्दों की हो भरमार, जानो उनका नहीं कोई सार, शब्दों के जो बरसाते पुष्प, मन से होContinue reading “शब्दों ने मचा रखा बवाल”

When God Comes Alive in Every Pore

When God permeates your being, He changes your way of seeing, When He comes alive in every pore, You can ask for nothing more, He comes and uplifts your vision Which then transcends every division, His grace purifies your soul, It makes your split self whole, Then all rancour and animus is gone, You lookContinue reading “When God Comes Alive in Every Pore”

सादगी से बड़ा न कोई गहना

सादा जीवन, उच्च विचार, निर्मल मन, उत्तम व्यवहार, सादा व्यक्ति सब से न्यारा, ईश्वर को वह सबसे प्यारा, जो सीधा-सादा और हो नेक, उसके पास अमूल्य निधि है एक, लोग चाहे हों उसपे हंसते, उसके संग प्रभु हैं बसते, उसकी सुध हैं ईश्वर लेते, दोनो हाथों से उसको देते, उसपर समस्त सृष्टि की छाया, यहीContinue reading “सादगी से बड़ा न कोई गहना”

Be A Viewer of the Eternal Flitting Show

Do not to anything try to hold fast, As nothing will forever last, Joys and sorrows come and go, Be a viewer of the eternal flitting show, When the shadow of impermanence everything chases, When even the grandest edifice built time razes, When everything vanishes like a passing cloud, Why should any attempt to clingContinue reading “Be A Viewer of the Eternal Flitting Show”

सीखें खुद ही के साथ जीना

अपना दर्द खुद से बाँटें, खुद ही चुनें राह के काँटे, खुद ही सिएँ अपना चाक सीना, सीखें खुद ही के साथ जीना, खुद ही ज़ख्मों पे मरहम लगाएँ, खुद ही बलाओं को दूर भगाएँ, खुद ही करें खुद का मुआयना, खुद ही दिखाएँ खुद को आईना, कौन आएगा तुम्हारा हाथ थामने, कौन आएगा तुम्हाराContinue reading “सीखें खुद ही के साथ जीना”

हर इक पर बरसती उस रब की रहमत

ज़र्रे-ज़र्रे में मेरे राब की निगाहे करम है, कौन कहता है, उस पे ज़्यादा और मुझ पे कम है, चप्पे-चप्पे पे दिखता है उसका नूरी जलाल, फिर क्यों हो उसको ले मन में कोई शुबहा या मलाल, हर इक पर बरसती उस रब की रहमत, क्यों न इसको समझने की करते हम ज़हमत, क्यों नContinue reading “हर इक पर बरसती उस रब की रहमत”

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