शब्दों ने मचा रखा बवाल

शब्दों की होती गहरी चाल,

शब्दों का अपना छद्म जाल,

शब्दों का अपना सम्मोहन,

शब्द हमारा करते दोहन,

शब्द हमें हैं भरमाते,

कपटी शब्दों का है खाते,

शब्द मति को करते भ्रष्ट,

शब्द कर सकते हमें त्रस्त,

जहां शब्दों की हो भरमार,

जानो उनका नहीं कोई सार,

शब्दों के जो बरसाते पुष्प,

मन से हो सकते वे शुष्क,

शब्दों का व्यापार जो करते,

शब्दों का हैं दम जो भरते,

दूरी उनसे बनाए रखिए,

सावधानी से उनको लखिए,

शब्दों ने मचा रखा है बवाल,

चहुं ओर शब्दों के भ्रम-जाल,

शब्दों की है जादू नगरी,

शब्दों की कभी भरे न गगरी,

मितभाषी को सखा जानिए,

उसे हितैषी अपना मानिए,

इस युग में जो रह सके है मौन,

शब्दों को जो जाने गौण,

उसके पास हो सकती अमूल्य निधि,

संभवतः वह बता पाए हमें जीने की विधि!

अरुण भगत

स्वरचित रचना

सर्वाधिकार सुरक्षित

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

4 thoughts on “शब्दों ने मचा रखा बवाल”

  1. सही कहा👌
    मौन ही वरदान है। श्रेष्ठ ज्ञान का परिचायक भी। प्रकृति भी तो यही सिखाती है।
    सुंदर विचार।

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    1. धन्यवाद, मंजुला जी! जहां बहुत से शब्द हमें भ्रमित कर सकते हैं, मौन का तो अपना अलग महत्व है। मौन में छिपी है जीवन की अमूल्य निधि!

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