गतिमान बन, कीर्तिमान बन

चल कदम बढ़ा, कहीं रह जाए न खड़ा, गतिमान बन, कीर्तिमान बन, कहीं रोक न ले तुझे तेरा मन! कर्म की तूँ कर उपासना, बाधा न बने कोई विषय वासना, हर कर्म हो तेरा निष्काम, ध्येय हो उच्च और भावना निष्पाप, कर्म ही स्वयं में श्रेष्ठ फल, न दे उसके परिणाम पर बल, उच्च कर्मContinue reading “गतिमान बन, कीर्तिमान बन”

मैंने लिखी एक कविता

मैंने मोबाइल पर लिखी एक कविता जैसे बहा दी हो शब्द सरिता, उसके पीछे था विचारों का एक रेला, और गहरी भावनाओं का पूरा मेला! प्रौद्योगिकी से ज़्यादा हैं नहीं वाक़िफ़, हमें वह ज़्यादा बैठती भी नहीं माफ़िक़, अंजाम यह कि डिलीट दब गया और जो लिखा था वह सब का सब गया! लिखा जबContinue reading “मैंने लिखी एक कविता”

कब छटेगा यह अंधेरा और देखेंगे हम एक नई भोर?

भावनाओं के स्तोत्र सब सूख गए, मन से मन के ताने बाने सब टूट गए, इंसान हो गया इंसान से कोसों दूर इंसानियत रह गयी ठगी और मज़बूर, मन से सब होते जा रहे बीमार, एक दूसरे को प्यार करने से लाचार, फिर भी अपने स्वार्थ की बेड़ियाँ न तोड़ पाएँ, अपने बेतुके अहंकार कोContinue reading “कब छटेगा यह अंधेरा और देखेंगे हम एक नई भोर?”

Everything About Love is So Beautiful and Right!

Love glows like a glow-worm in the night, Everything about it is so beautiful and right! With its ethereal magic it your life suffuses, To entertain any thought of hate it just refuses! For every wounded soul it is the healing balm, It keeps you so centred and calm! Like love there is no blessingContinue reading “Everything About Love is So Beautiful and Right!”

आओ हिंदी दिवस मनाएँ

आओ हिंदी दिवस मनाएँ, माँ बोली के गीत हैं गाएँ! माँ बोली होती सबसे प्यारी, लगती है वह सबसे न्यारी! माँ बोली है मूल से जोड़े, इससे क्योंकर नाता तोड़ें? यह है हमारे दिलों की भाषा, इससे जुड़ी हमारी हर आशा, यह हमारी संस्कृति का दर्पण, क्यों न करें इस पर स्वयं को अर्पण? माँContinue reading “आओ हिंदी दिवस मनाएँ”

यही प्रकृति का चक्र, यही उसकी सरसता

रिमझिम बारिश की बूँदें, आत्मसात् कर लो आँखें मूँदे! आकाश के कलश से छलकता यह अमृत, धरा के कण कण को कर दे है पुलकित! झूमती ये हवाएँ, कोयल है गीत गाए, नाचते हैं मोर, फसलें लहलहाएँ! अम्बर में दौड़ते बादल कभी छट जाएँ, कभी गहरायें, कभी यह बरसते, कभी हमें भरमाएँ, बदलती इनकी छटाएँContinue reading “यही प्रकृति का चक्र, यही उसकी सरसता”

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