जो जीता वही सिकंदर–एक भ्रम आसक्ति

जो जीता वही सिकंदर, जो हारे न उसके कुछ पल्ले, न उसके अंदर! जीतने वाले का जादू सिर चढ़ कर बोले, हारने वाले का तो जैसे सूरज ही अस्त हो जाए हौले हौले! जीतने वाले का सब लोहा मानें, हारने वाले को कौन है जाने? जीतने वाले का तो झूठ भी सच माना जाए, हारनेContinue reading “जो जीता वही सिकंदर–एक भ्रम आसक्ति”

दीपावली के शुभ अवसर पर—

इस दिवाली कर जीवन अपना प्रकाशित, स्वयं की गरिमा बढ़ा, सत्य को कर स्थापित, आत्मा को बना प्रहरी, असत्य को कर निष्कासित, छल कपट का साथ दे न कर स्वयं को श्रापित, धर्म की उठा पताका, स्वयं को बना सबल, इच्छा सर्वोत्तम जीवन जीने की हो जाए तेरी प्रबल, कर धारण ज्ञान को, अज्ञानता कोContinue reading “दीपावली के शुभ अवसर पर—”

On this festival of lights—

On this festival of lights, spread light all around, Why shouldn’t you with positivity yourself surround? Let the light of righteousness the whole world illuminate Where no one does another humiliate, Where the light of truth and reason beckons all, Where none between one person and another does erect a wall, Where right invariably prevailsContinue reading “On this festival of lights—”

अनंत नभ को नाप ले

तूँ चला चल अपनी राह, जीवन की तूँ पा ले थाह, कोई साथ दे तो ले अपने संग, नहीं तो देख अकेले ज़िंदगी के रंग, दुनिया को देख न बदल अपने ढंग, न अपनी सोच को बना तूँ तंग, जीवन सागर की तरह तूँ बन विशाल, फिर देख तूँ कुदरत के कमाल! जीवन सिंधु केContinue reading “अनंत नभ को नाप ले”

धीरे धीरे

धीरे धीरे, रे मना, धीरे सब कुछ होए, क्यों रहता है जल्दी में, क्यों आपा है खोए? धीरे पढ़िए, धीरे गुनिये, धीरे मन में उतारिए, धीरे धीरे हौले हौले अपने जीवन को संवारिए, धीरे धीरे होती हैं खोजें, धीरे धीरे आविष्कार, धीरे धीरे ही होते मानव निर्माण के सपने साकार, धीरे धीरे ही पक करContinue reading “धीरे धीरे”

रिश्ता वही जो दे रूह को सकूँ

रिश्ते कहने से नहीं बनते, वे बनते हैं उन्हें जीने से, कहने से ही अगर रिश्ते बन जाते प्रगाढ़, तो फिर तो उम्दा रिश्तों की आ जाती बाढ़! आज अगर रिश्ते रह गये हैं सिर्फ़ नाम के, तो हैं वे फिर किस काम के? हैं भी और नहीं भी, इसी ऊहापोह में ज़िंदगी हो जातीContinue reading “रिश्ता वही जो दे रूह को सकूँ”

A Benumbed Conscience is A Dangerous Thing

The dumbing down of our conscience, Where will it us lead? It will only lead us to commit black deed upon black deed! A benumbed conscience is a dangerous thing, It lets our devilish tendencies take wing! It makes us fall and fall from grace, It leaves of our humanity not even the slightest trace!Continue reading “A Benumbed Conscience is A Dangerous Thing”

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