प्रकाश फैलाए नव वर्ष

प्रकाश फैलाए नव वर्ष

हर ओर हो उल्लास और हर्ष,

सत्य की गुंजार हो,

प्रेम पथ विस्तार हो,

स्नेह का डंका बजे,

वैर भाव हर कोई तजे,

चरित्र का जीर्णोद्धार हो,

हर उच्च स्वप्न साकार हो,

मंगलदायिनी यह धरा,

दूर हों जर और जरा,

युद्धों का तांडव बंद हो,

सुदृष्टि पाएँ जो अंध हों,

धरती के घाव जो हैं हरे,

हर एक मानव उन्हें भरे,

हो निर्भय निर्वैर आगे बढ़ें

किसी आततायी से न डरें,

आत्म-कल्याण का खुले द्वार,

जीवन मूल्यों पर हो विचार,

नव वर्ष की यह मंगल बेला,

सद्कर्मों का लग जाए मेला,

जड़-चेतन का कल्याण हो,

गौरव का संज्ञान हो!

नव वर्ष की आपक सब को ढेरों शुभकामनाएँ

अरुण भगत

सर्वाधिकार सुरक्षित

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

6 thoughts on “प्रकाश फैलाए नव वर्ष”

  1. बहुत अच्छी कविता।
    हर और हो उल्लास और हर्ष।👌👌👌🙏🙏🙏

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