नव वर्ष की पूर्व-संध्या पर कुछ विचार, मन के उद्ग़ार

बाईस तईस कुछ नहीं,

नया पुराना कुछ नहीं,

समय तो एक सतत प्रवाह है,

नयी हो सकती है हमारी सोच,

एक नया दृष्टिकोण,

जीने का एक नया अन्दाज़,

नए गंतव्यों की ओर बढ़ जाने की चाह,

मन की एक नयी लहर, एक नयी मौज,

पुराने जाल में फँसे रहे,

वही पुरानी सोच, पुराने मापदंड,

वही पुरानी ऊब भरी ज़िंदगी,

वही पुराने थके हुए रिश्ते,

वही हालातों से पुरानी लड़ाई,

तो नए साल का क्या अभिप्राय,

क्या उल्लास, क्या उत्सव,

अगर अंदर कुछ नहीं बदला,

तो यह उत्सव भी एक बेमानी रीत ही है,

नया-नया कह मन को बहलाते,

जबकि जीवन में नया कुछ भी तो नहीं,

जब खा पी, गा, नाच, लकीर के फ़क़ीर,

नए साल का करें शोरोगुल से स्वागत,

तो यह सोचें अवश्य कि नया क्या है

अगर उसी घिसी-पिटी ज़िंदगी में

लौट जाना है कल कोल्हू के बैल बन,

तो जश्न किस बात का, किस बात का नृत्य,

जीवन तो वह है जो हो नित नया,

लाये नयी चेतना, नयी ऊर्जा,

विहंगम दृश्यों को दर्शाते

चित के नये पट खोल दे,

फिर हर पल नया पल,

हर दिन नया साल,

जीवन ही बन जाए उत्सव!

अरुण भगत

सर्वाधिकार सुरक्षित

#arunbhagatwrites#poetry# poeticoutpourings#outpouringsof myheart#writer#Indianwriter#englishpoetry#hindipoetry#poetryofthesoul

Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

12 thoughts on “नव वर्ष की पूर्व-संध्या पर कुछ विचार, मन के उद्ग़ार”

  1. जीवन में उमंग भरती बेहद उर्जावान कविता 👌👌👌💐💐💐

    Like

    1. धन्यवाद, मीनाक्षी जी! जीवन ऊर्जावान और नवीनता लिए होना भी चाहिए, उसी में सार्थकता है!

      Like

  2. सर जी आपकी कविता में पूर्ण सच्चाई है हमें अपने को बदल कर नया ऐम बनाकर उसे पूरा कर सकते हैं अति सुन्दर रचना है सर जी

    Like

    1. धन्यवाद, अजय जी! जीवन में कुछ नया, कुछ नए लक्ष्य होने भी चाहिएँ! नव वर्ष आपके जीवन में नवीनता लाए, यही प्रभु से प्रार्थना है!

      Like

  3. बाईस – तेईस कुछ नहीं….. हर पल नया पल!
    वाकई बहुत अच्छी कविता लगी सर।👌👌👌💐💐💐

    Like

    1. धन्यवाद, ममता जी! जीवन में कुछ नया है तो नया साल है, नहीं तो नया साल कुछ भी नहीं!

      Like

  4. अति सुंदर संदेश, प्रोफेसर साहेब! किसी उपरी उत्सव का कोई मायने नहीं है, जबतक कोई अर्थपूर्ण आंतरिक बदलाव ना हो।

    Like

    1. बहुत बहुत धन्यवाद, भ्राता! जीवन में नवीनता हो तो तभी नव वर्ष सार्थक है!

      Like

Leave a Reply

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free