कड़वे घूँट पी लिए बहुत,
चलिए, कुछ मीठा हो जाये,
टेढ़ी-मेढ़ी ज़िंदगी जी ली बहुत,
अब कुछ सीधा हो जाए,
बहुत लगा लिए दांव-पेच,
अब मोहब्बत से दिल जीते जाएँ,
झूठ फ़रेब हो गया बहुत,
अब सच का दामन पकड़ा जाए,
तिकड़में लगा के भी क्या पाया,
अब भोले संत बना जाए,
अहम की खेती कर ली बहुत,
अब नम्रता का बीज बोया जाए,
अपेक्षाओं का घड़ा भर लिया पूरा,
अब समर्पण भाव से जिया जाए,
थक गए पाप की गठड़ी को ढोते-ढोते,
अब पुण्यता को मानक बना जिया जाए,
विनाश का तांडव हम सब देख रहे,
क्यों न सृजन की ओर मुख किया जाए?
अरुण भगत
सर्वाधिकार सुरक्षित
#arunbhagatwrites#poetry# poeticoutpourings#outpouringsof myheart#writer#Indianwriter#englishpoetry#hindipoetry#poetryofthesoul
Well said sir…..as always 💯❤
LikeLike
Thanks a lot, Sapna! God bless you!
LikeLike
अति सुंदर संदेश जो जीवन में एक सीधे और सरल मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है!
LikeLike
धन्यवाद , भाई! आपके प्रेम के लिए आपका ऋणी हूँ!
LikeLike