अब कुछ सीधा हो जाए

कड़वे घूँट पी लिए बहुत,

चलिए, कुछ मीठा हो जाये,

टेढ़ी-मेढ़ी ज़िंदगी जी ली बहुत,

अब कुछ सीधा हो जाए,

बहुत लगा लिए दांव-पेच,

अब मोहब्बत से दिल जीते जाएँ,

झूठ फ़रेब हो गया बहुत,

अब सच का दामन पकड़ा जाए,

तिकड़में लगा के भी क्या पाया,

अब भोले संत बना जाए,

अहम की खेती कर ली बहुत,

अब नम्रता का बीज बोया जाए,

अपेक्षाओं का घड़ा भर लिया पूरा,

अब समर्पण भाव से जिया जाए,

थक गए पाप की गठड़ी को ढोते-ढोते,

अब पुण्यता को मानक बना जिया जाए,

विनाश का तांडव हम सब देख रहे,

क्यों न सृजन की ओर मुख किया जाए?

अरुण भगत

सर्वाधिकार सुरक्षित

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

4 thoughts on “अब कुछ सीधा हो जाए”

  1. अति सुंदर संदेश जो जीवन में एक सीधे और सरल मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है!

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