हर पल को तूँ सहर्ष स्वीकार कर

हर पल को तूँ स्वीकार कर,

न कर विरोध उसका, न प्रतिकार कर,

हर पल में छिपी अमूल्य निधि,

सीख ले उससे जीने की विधि ,

असीमित सम्भावनाएँ पलतीं पल के गर्भ में,

न गवाँ उनको तूँ अपने दर्भ में,

पल में तूँ देख सारा ब्रह्मांड,

पल में है ज्ञान प्रकांड,

पल में ही जीवन का सार,

एक पल लगा सकता है बेड़ा पार,

पल में ही जीवन फलता फूलता,

पल ही होता सारगर्भित मूलतः,

पल में ही होता जीवन उदय,

पल में ही पल्लवित होता हृदय,

पल को ही अपना इष्ट जान,

पल को ही अपना सर्वस्व मान,

हर पल को तूँ सहर्ष स्वीकार कर,

न कर विरोध उसका, न प्रतिकार कर!

अरुण भगत

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

9 thoughts on “हर पल को तूँ सहर्ष स्वीकार कर

  1. बिल्कुल सही सर । जो भी इस पल में गठित हो रहा है वो सब हमें स्वीकार कर लेना चाहिए । हर पल मूल्यवान होता है।

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  2. बहुत खूब लिखा है Sir
    जिसने पल-पल की महत्ता को समझकर उसका सही उपयोग करना जान लिया, उसी ने जग जीता है👌👌👌👌💐💐💐🙏🙏

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