म
हर पल को तूँ स्वीकार कर,
न कर विरोध उसका, न प्रतिकार कर,
हर पल में छिपी अमूल्य निधि,
सीख ले उससे जीने की विधि ,
असीमित सम्भावनाएँ पलतीं पल के गर्भ में,
न गवाँ उनको तूँ अपने दर्भ में,
पल में तूँ देख सारा ब्रह्मांड,
पल में है ज्ञान प्रकांड,
पल में ही जीवन का सार,
एक पल लगा सकता है बेड़ा पार,
पल में ही जीवन फलता फूलता,
पल ही होता सारगर्भित मूलतः,
पल में ही होता जीवन उदय,
पल में ही पल्लवित होता हृदय,
पल को ही अपना इष्ट जान,
पल को ही अपना सर्वस्व मान,
हर पल को तूँ सहर्ष स्वीकार कर,
न कर विरोध उसका, न प्रतिकार कर!
अरुण भगत
#arunbhagatwrites #poetry #poeticoutpourings #outpouringsofmyheart #writer #indianwriter #englishpoetry #poetryofthesoul
बिल्कुल सही सर । जो भी इस पल में गठित हो रहा है वो सब हमें स्वीकार कर लेना चाहिए । हर पल मूल्यवान होता है।
LikeLike
Work hard every second of life one day definitely u will get success…. Owsm lines❣️
LikeLike
Very nice sir❤️everytime something new😍
LikeLike
🔥🔥👏👏
LikeLike
Bahut khoob Sir!!!!
LikeLike
बहुत खूब लिखा है Sir
जिसने पल-पल की महत्ता को समझकर उसका सही उपयोग करना जान लिया, उसी ने जग जीता है👌👌👌👌💐💐💐🙏🙏
LikeLike
Bahut khoob..👌
Inspiring poetry..
LikeLike
Very inspiring poem Sir.
Regards
LikeLike
Thank you very much, Snehlata Ma’m! It is indeed our sacred human duty to keep inspiring each other, isn’t it?
LikeLike