तूँ चला चल अपनी राह,
जीवन की तूँ पा ले थाह,
कोई साथ दे तो ले अपने संग,
नहीं तो देख अकेले ज़िंदगी के रंग,
दुनिया को देख न बदल अपने ढंग,
न अपनी सोच को बना तूँ तंग,
जीवन सागर की तरह तूँ बन विशाल,
फिर देख तूँ कुदरत के कमाल!
जीवन सिंधु के तल से तूँ चुन ला मोती,
फिर देख जागते हुए तेरी क़िस्मत जो सोती,
बढ़ जा आगे अपनी धुन में मस्त,
न पड़ शिथिल, न होने से अपने हौंसले को पस्त,
जीवित है तूँ, रख सदैव स्वयं को जीवंत,
न जकड़ किसी बेड़ी में खुद को,न होने दे खुद को परतंत्र,
आगे की जाने कौन, इसी जीवन में ही हो मुक्त,
ज्ञान का प्रसार हो, अज्ञानता हो तेरी लुप्त,
सरल और स्वच्छंद भाव से जीवन तूँ जी,
अनंत नभ को नाप ले, मुक्ति बोध का अमूल्य रस तूँ पी!
अरुण भगत
Well said sir💯💯💯
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Thank you very much, Sapna dear! Live life in line with your own truth and live it well.
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Iski buhut zaroorat thi… sir
Thanks for sharing the Super motivational poetry 🙂
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धन्यवाद, शिवम् जी! श्रेष्ठ जीवन जीने के लिए हम सब को प्रेरणा चाहिए। मैं लिख कर प्रेरित हुआ. आप पढ़ कर!
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Bahut sundar sandesh deti kavita 👏👏💐💐💐🙏
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धन्यवाद, मीनाक्षी मैडम! जीवन भी सुंदर होना चाहिए और संदेश भी!
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Bahut khoob!!!!!
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बहुत बहुत धन्यवाद, नेहा जी! अनंत नभ को नापें और स्वच्छंद जीवन जिएँ!
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Wow👌👌
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धन्यवाद, साहिल जी! खुश रहिए, आज़ाद रहिए!
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अति सुंदर और प्रेरणा दायक प्रोफ़ेसर साहब!
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बहुत बहुत धन्यवाद, प्रिय भाई! सब ईश्वर की कृपा है!
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Awesome poem, sir!
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बहुत बहुत धन्यवाद, विजय लक्ष्मी! आपका जीवन सार्थक और मंगलमय हो!
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“जीवन सिंधु के तल से तू चुन ले मोती।”
बहुत ही बेहतरीन लाईन लगी।
बहुत-बहुत धन्यवाद सर आपका।
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धन्यवाद, ममता जी! खुश रहिए!
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Awesome poem, sir
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Thank you, Nikhil dear! Happy that you liked the poem! Stay blessed.
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