अनंत नभ को नाप ले

तूँ चला चल अपनी राह,

जीवन की तूँ पा ले थाह,

कोई साथ दे तो ले अपने संग,

नहीं तो देख अकेले ज़िंदगी के रंग,

दुनिया को देख न बदल अपने ढंग,

न अपनी सोच को बना तूँ तंग,

जीवन सागर की तरह तूँ बन विशाल,

फिर देख तूँ कुदरत के कमाल!

जीवन सिंधु के तल से तूँ चुन ला मोती,

फिर देख जागते हुए तेरी क़िस्मत जो सोती,

बढ़ जा आगे अपनी धुन में मस्त,

न पड़ शिथिल, न होने से अपने हौंसले को पस्त,

जीवित है तूँ, रख सदैव स्वयं को जीवंत,

न जकड़ किसी बेड़ी में खुद को,न होने दे खुद को परतंत्र,

आगे की जाने कौन, इसी जीवन में ही हो मुक्त,

ज्ञान का प्रसार हो, अज्ञानता हो तेरी लुप्त,

सरल और स्वच्छंद भाव से जीवन तूँ जी,

अनंत नभ को नाप ले, मुक्ति बोध का अमूल्य रस तूँ पी!

अरुण भगत

Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

18 thoughts on “अनंत नभ को नाप ले

    1. धन्यवाद, शिवम् जी! श्रेष्ठ जीवन जीने के लिए हम सब को प्रेरणा चाहिए। मैं लिख कर प्रेरित हुआ. आप पढ़ कर!

      Liked by 1 person

  1. “जीवन सिंधु के तल से तू चुन ले मोती।”
    बहुत ही बेहतरीन लाईन लगी।
    बहुत-बहुत धन्यवाद सर आपका।

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