सच की राह पे चल और जी तूँ शान से,
फिर कौन है जो खेल पाए तेरी आन से?
सच को ही जी और झूठ का विष न पी,
झूठ के विषपान ने बहुतेरों की है जान ली!
अपने प्रभु से, अपने इष्ट से इतना बल तूँ माँग
कि असत्य के कुचक्र को तूँ सके हैं लांघ!
जब भी देख झूठ और प्रपंच का बादल गहरा,
जुटा अपनी हिम्मत और सच की पताका फहरा!
याद रख जहां झूठ के तो पाँव नहीं होते,
वहाँ सत्य के सब सदैव चरण हैं धोते!
सत्य को सब स्मरण करते, सत्य ही अजर अमर,
सत्य ही है जीतता जब असत्य से होता समर!
सत्य ही तो है सत्य में जीवन का केंद्र बिंदु,
सत्य की नौका ही तो पार कराती है भव सिंधु!
सत्य का कवच पहन निकल जब असत्य की हो काली रात,
सत्य ही है प्राण रक्षक जब लगा के असत्य बैठा हो घात!
अरुण भगत
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Superb Sir🔥🔥
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Thank you very much, Adsu dear! Stay blessed.
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True always win sir😇😇😇
Nice lines sir😇❤🥰
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Thank you, Sapna dear! God bless you!
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The truth is always be the truth..
Very nice sir..👌
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Thank you, dear! May truth prevail in the world!
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surprise to see the unfathomable knowledge and command over language….
Superb sir…
Best poem I have ever read….truly mesmerising…
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All God’s grace, Ma’m! You can do anything well if you really set out to do it!
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बहुत ही सुन्दर सर! सत्य की बहुत ही सुन्दर व्याख्या!
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बहुत बहुत धन्यवाद आपका! अच्छा लगा कि आपको सत्य की व्याख्या अच्छी लगी!
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वास्तव में, सत्य बोलने वाले लोग ही अंदर से मजबूत होते हैं और शान से जिंदगी जीते हैं।
इसका उदाहरण आप है सर। 🙏🙏💐💐💐
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बहुत बहुत धन्यवाद आपका, ममता मैडम, रचना और मेरे लिए आपके आशीर्वचनों के लिए! खुश रहिए!
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Wonderful poem carved with beautiful & veracious lines!!!!
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बहुत बहुत धन्यवाद आपका, नेहा जी, कविता में कुछ सुंदर और अदभुत देखने के लिए !
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Conveyed perfect message through perfect selection of syntax…Superb
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धन्यवाद, प्रियंका जी! अच्छा लगा कि आपको कविता में कुछ खूबी दिखी !
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