सत्य ही है जीतता जब असत्य से होता समर

सच की राह पे चल और जी तूँ शान से,

फिर कौन है जो खेल पाए तेरी आन से?

सच को ही जी और झूठ का विष न पी,

झूठ के विषपान ने बहुतेरों की है जान ली!

अपने प्रभु से, अपने इष्ट से इतना बल तूँ माँग

कि असत्य के कुचक्र को तूँ सके हैं लांघ!

जब भी देख झूठ और प्रपंच का बादल गहरा,

जुटा अपनी हिम्मत और सच की पताका फहरा!

याद रख जहां झूठ के तो पाँव नहीं होते,

वहाँ सत्य के सब सदैव चरण हैं धोते!

सत्य को सब स्मरण करते, सत्य ही अजर अमर,

सत्य ही है जीतता जब असत्य से होता समर!

सत्य ही तो है सत्य में जीवन का केंद्र बिंदु,

सत्य की नौका ही तो पार कराती है भव सिंधु!

सत्य का कवच पहन निकल जब असत्य की हो काली रात,

सत्य ही है प्राण रक्षक जब लगा के असत्य बैठा हो घात!

अरुण भगत

#arunbhagatwrites#poeticoutpourings#outpouringsofmyheart

#writer#poetry#

englishpoetry#indianwriter#poetryofthesoul

#hindipoetry

Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

16 thoughts on “सत्य ही है जीतता जब असत्य से होता समर

  1. surprise to see the unfathomable knowledge and command over language….
    Superb sir…

    Best poem I have ever read….truly mesmerising…

    Like

  2. बहुत ही सुन्दर सर! सत्य की बहुत ही सुन्दर व्याख्या!

    Like

    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका! अच्छा लगा कि आपको सत्य की व्याख्या अच्छी लगी!

      Like

  3. वास्तव में, सत्य बोलने वाले लोग ही अंदर से मजबूत होते हैं और शान से जिंदगी जीते हैं।
    इसका उदाहरण आप है सर। 🙏🙏💐💐💐

    Like

    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका, ममता मैडम, रचना और मेरे लिए आपके आशीर्वचनों के लिए! खुश रहिए!

      Like

    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका, नेहा जी, कविता में कुछ सुंदर और अदभुत देखने के लिए !

      Like

    1. धन्यवाद, प्रियंका जी! अच्छा लगा कि आपको कविता में कुछ खूबी दिखी !

      Like

Leave a reply to Arun Bhagat Cancel reply

Design a site like this with WordPress.com
Get started