यह कौन है जो शून्य में तकती ?

यह कौन है जो मौन खड़ी,

मुसीबतों से घिरी, मुश्किल में पड़ी!

यह कौन है जो शून्य में तकती,

ऐसा लगे जैसे कुछ कर नहीं सकती!

यह कौन है जिसे कोई कुछ न जाने,

और जिसका अस्तित्व कोई नहीं है माने!

यह कौन है जिसकी सिसकियाँ अंदर ही घुटतीं,

और जिसकी ख्वाहिशें रोज़ हैं लुटतीं,

यह कौन है जो अपनों के लिए मर मिटती,

फिर भी की जाती प्रताड़ित और है पिटती?

यह है हमारे जीवन की धुरी,

जीवन को दे गति जिस ओर भी है मुड़ी!

न देती केवल जीवन दान,हमारे जीवन को सम्मान,

अपितु करती भरन पोषण और प्रदान करती हमें संस्कार,

यह है परिवार का आधार, समाज की सूत्रधार,

मझदार में फँसी नाव को लगाती यह पार!

इसे भी चाहिए न केवल जीवनदान,

पर अपनी जगह, अपनी पहचान,

इसे भी चाहिए अपनी स्वतंत्रता,

क्यों यह माने किसी की परतंत्रता?

क्यों यह कुचले अपने अरमान,

क्यों यह माने अनुचित फ़रमान?,

क्यों न छुए ऊँचाइयों को

इंतज़ार करती उसका जो?

न्याय और मानवता की है यही माँग,

और देश दुनिया का भी इसी में कल्याण!

वही ले जाएगी हमें विश्व प्रेम और शांति की ओर

जिसका आज न कोई ठिकाना, न कोई ठौर !

वही करेगी विश्व कल्याण के सपने को साकार,

वही देगी एक सुंदर , सार्थक और सबल समाज को आकार !

अरुण भगत

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

16 thoughts on “यह कौन है जो शून्य में तकती ?”

  1. बहुत ही सुंदर कविता है सर । इस कविता के माध्यम से आपने सभी जीवन का आइना दिखा दिया ।

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    1. धन्यवाद, राशी जी! समाज को बेहतरी की ओर ले जाने के लिए ऐसी बात चीत आवश्यक है!

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  2. बहुत ही सुंदर! उत्कृष्ट परिमार्जित एवं संस्कारित कविता लगी सर।🙏🙏🙏

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    1. उत्साहवर्धन के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद, ममता मैडम! मुद्दा महत्वपूर्ण है और उस पे विचार होना चाहिए!

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