वक़्त अच्छा भी आएगा

वक़्त अच्छा भी आएगा,

फिर सब कुछ भाएगा,

फिर बजेगी मन की तार,

फिर थिरकेंगे पाँव,

फिर झूमेगी मस्त पवन

सपनों की होगी उन्मुक्त उड़ान,

लहराएँगे उम्मीदों के फिर परचम!

बस्तियाँ होंगी फिर आबाद,

फिर कहकहे गूंजेंगे,

फिर महफ़िलों के दौर चलेंगे,

फिर सजेंगी बारातें,

फिर मिलेंगे हम सब गले

जब मौत के मंडराते सायों से

हम आख़िर होंगे आज़ाद!

जो हमसे बिछुड़ गए हैं

उन्हें करेंगे नमन सादर

और फिर बढ़ जाएँगे

इस जीवन पथ पर

गले लगाने एक नयी सुबह को,

भरने नये नये रंग

नये जोश के संग!

अरुण भगत

Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

18 thoughts on “वक़्त अच्छा भी आएगा

  1. बिल्कुल सही कहा सर आपने वक्त अच्छा भी आएगा।
    बहुत सुंदर कविता लगी।

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    1. बेहतरीन विद्यार्थियों के लिए कविता बेहतरीन ही होनी चाहिए, श्वेता जी!

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  2. बहुत ही सुन्दर कविता है सर । वैसे भी हर समय एक जैसा नहीं रहता आज मुश्किलें है तो कल खुशियां भी आएंगी और ये बुरा वक्त भी टल जाएगा ।

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    1. सही है, राशी! जीवन है ही परिवर्तनशील! जब अच्छा समय नहीं रहता तो बुरा भी नहीं रहेगा! आपकी सराहना के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद!

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