सफल होगा दुर्लभ जीवन तेरा

मन, तू हिम्मत न हार अपने भय पर कर प्रहार हो जाएगा बेड़ा पार निर्भयता की जोत जला टल जाएगी हर एक बला आत्मविश्वास का बना सेतु कुछ न कर पाएँगे राहु-केतु दृढ़ निश्चय कर बढ़ जा आगे देख कैसे सब संशय भागें तेरे घट में बैठे प्रभु राम रमा ले मन में उनका नामContinue reading “सफल होगा दुर्लभ जीवन तेरा”

होंगे तुम्हारे ये धरा और गगन

निर्भय हो आगे बढ़ो सत्य सीढ़ी पर चढ़ो निष्ठा को बनाओ ढाल असत्य का बेंधो हर जाल अहंकार पर करो प्रहार स्वार्थ न हो सर पर सवार कायर बन न हर दिन मरो न अकारण ही तुम डरो ज्ञान का दीपक जलाओ जीवन को सार्थक बनाओ बलिष्ठ बनो और बनो समर्थ अमूल्य जीवन न होContinue reading “होंगे तुम्हारे ये धरा और गगन”

दोस्त, फ़ुरसत में कभी आना तुम

दोस्त, फ़ुरसत में कभी आना तुम सकूँ भरे लम्हे साथ लाना तुम इत्मीनान से बातें दो-चार करेंगे ज़िंदगी के कैनवस में नए रंग भरेंगे पुरानी मीठी यादें ताज़ा करेंगे मिल बैठ उनमें इक नई रूह भरेंगे ठंडे पड़ गए रिश्तों में फूँकेंगे नई जान मिल जाए जैसे हीरों की कोई ख़ान आबाद करेंगे फिर दिलContinue reading “दोस्त, फ़ुरसत में कभी आना तुम”

शून्य और शून्य के बीच

जीवन एक छोटा सा अंतराल ही तो है शून्य और शून्य के बीच, शाश्वत मौन और मौन के बीच, फिर इसको लेकर इतना कोहराम क्यों, कोलाहल क्यों ? कहाँ ले जाएगी यह सरपट दौड़, क्या पा लेंगे, क्या पास रह जाएगा, क्यों चिंता हैं खोने की जब अपना कुछ है ही नहीं ? जब कुछContinue reading “शून्य और शून्य के बीच”

क्यों?

ख़ाली हाथ आए, ख़ाली हाथ जाना, भाग मृगतृष्णाओं के पीछे कुछ नहीं है पाना, अटल सत्य से हम सब दूर भागते, रहते सोए, कभी न जागते, भ्रम में जीते, भ्रम में मरते, आलिंगन सत्य का कभी न करते, यूहीं दौड़ती विकारों की गाड़ी, यूहीं उलझाती अज्ञानता की बाढ़ी, यूहीं मद सिर चढ़ कर बोलता, पटContinue reading “क्यों?”

मुझे गिला है उनसे

मुझे गिला है उनसे जो सच को सच नहीं कहते जो झूठ की मार को चुप-चाप अनचाहे सहते झूठ को जाने-अनजाने वो देते बल नहीं समझते कि कड़वा होगा उसका फल नहीं सोचते वो कि झूठ का यूँ फैलेगा जाल तो क्या होगी हमारी गति, हमारा हाल समय की यह माँग है कि सच केContinue reading “मुझे गिला है उनसे”

आज से हर लम्हे को मनाते हैं

नये साल में नई सोच आज से हर लम्हे को मनाते हैं उसे अपने ख़्वाबों से सजाते हैं सुरमई शाम से कुछ रंग चुराते हैं उनसे अपनी क़िस्मत को लुभाते हैं हर लम्हे को संवारना है हमारा फ़र्ज़ यह है ज़िंदगी का हम पर क़र्ज़ आओ इस क़र्ज़ को चुकातें हैं उम्मीदों की शमा हरContinue reading “आज से हर लम्हे को मनाते हैं”

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