वे लोग अच्छे होते हैं जो मन से बच्चे होते हैं मन को यूँ भा जाते हैं क्योंकि वे सच्चे होते हैं इस कपटी दुनिया में जो रह पाते हैं अबोध वही जन ईश्वर को भाते उन्हें है जीवनामृत का बोध जो हैं सरल हृदय निष्पाप छूता उन्हें न कोई संताप जिस अनुकंपा को जगContinue reading “बांह पसार ऐसे जन को मिलिए”
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When Feelings Run Dry…
When feelings run dry, You live in a landscape barren Where nothing grows or sprouts. In the mad din of things material, You just barely merely exist, Trying to salvage your soul That has run out of its food. Left in this spiritual wasteland Is a strange benumbing discontent, A restlessness that sears your being,Continue reading “When Feelings Run Dry…”
नए साल की हो नई रीत
एक साल और बीता कुछ खट्टा कुछ मीठा कुछ रह गया रीता कुछ ख्वाहिशें हुईं पूरी कुछ रह ही गईं अधूरी टूटे कुछ सजीले सपने पराए हो गए जो थे अपने कोई राह जाते पिछड़ गया कोई जग छोड़ बिछड़ गया जहाँ कुछ नए रिश्ते मिले पुरानों को खा गए गिले जंगों के रह-रह शोलेContinue reading “नए साल की हो नई रीत”
मुझे गिला नहीं …
मुझे गिला नहीं कि तूँ बिछड़ गया टीस ये है तूँ मेरा कभी था ही नहीं मैं जानता था की सच का रस्ता होगा दुश्वार मगर तूँ उस राह का मुसाफ़िर कभी था ही नहीं लगता था मंज़िल-ए – मुक़्क़दस तेरे कदम चूमेगी मगर तूँ उस मंज़िल का तलबगार कभी था ही नहीं सोचता थाContinue reading “मुझे गिला नहीं …”
अंधे युग की टेढ़ी चाल
अंधे युग की अंधी दौड़ आगे दौड़, पीछे चौड़ अंधे युग की अंधी बातें सहमे दिन ,काली रातें अंधे युग की टेढ़ी चाल रूठे सुर, बिगड़ी ताल अंधे युग की अंधी भूख गई समझ की डाली सूख अंधे युग के विकृत बोल भरे घावों को देते खोल अंधे युग में झूठ की जीत बन गईContinue reading “अंधे युग की टेढ़ी चाल”
कौन है वो ?
वो कौन है जो बन मेरा मुर्शिद हर घड़ी मुझे राह दिखाता है पल-पल मेरा हौंसला बढ़ाता है टेड़े रस्तों पे भी फ़ख़्र से चलाता है कौन है जो गहरी उदास शामों को जला उम्मीद की शमा रौशन बनाता है बैचैन बे-करार लम्हों में मुझे सकूँ और चैन की नींद सुलाता है कौन है जोContinue reading “कौन है वो ?”
बाकी तो सब है इक झूठा फ़साना
क्या छिन गया तुम्हारा जो उदास हो क्या लाये थे साथ जो हताश हो खाली हाथ आए खाली हाथ जाना फिर क्यों बेवजह बुनते हो ख्वाहिशों का ताना बाना काहे की रंजिश काहे का वैर कौन है अपना कौन है ग़ैर कुछ देर के मुसाफ़िर जाना है कहीं दूर जहाँ सुरमई शामों में बसता हैContinue reading “बाकी तो सब है इक झूठा फ़साना”
के ख़ाक है ये
“You are dust and to dust you shall return.” के ख़ाक है ये ख़ाक में मिल जाएगी फिर कोई और रूप धर स्वाँग ये रचाएगी फिर शुरू होगी दौड़-धूप फिर वही धूप-छाँव फिर वही कश्मकश फिर वही शहर- गाँव यूहीं चलेंगे ये सिलसिले कहाँ इसका सुराग मिले कौन रह रह के नचा रहा हमें दुनियावीContinue reading “के ख़ाक है ये”
कुदरत तोड़ेगी हमारा ग़ुरूर
ये आसमानों में ठहरा हुआ ज़हरीला धुआँ ये कन्हैया की यमुना का झाग-झाग पानी ये तेज़ी से पिघलते सिमटते बर्फ के तोदे बारिशों में क़हर बरपाती पहाड़ी नदियाँ हमारी मिट्टी में घुल मिल गया ये ज़हर बे-दर्दी से सब कुछ झुलसाती गर्मियाँ फटते और बेतहाशा बरसते ये बादल दरदराते धंसते हुए हमारे दिलकश पहाड़ ज़मींContinue reading “कुदरत तोड़ेगी हमारा ग़ुरूर”
Love Encompasses All Hug the tree of love with all your heart, It is the only saviour in this soulless mart. Hold it and do not let go, To the world the beacon of love show. Let your love others’ wounds heal, Can there be any better deal? Love those suffocated by hate, To theContinue reading